पुरानी दिल्ली, ख़ासतौर पर जामा मस्जिद और मटिया महल इलाक़े में, रमज़ान की रातें ख़ास और अलैहदा होती है. इफ़्तार से लेकर सहरी के वक़्त तक सिर्फ़ खाने-पीने के ठिकाने ही नहीं, मुख़्तलिफ़ क़िस्म की चीज़ों के तिजारती ज़रूरमंदों की भीड़ से घिरे रहते हैं – अत्तार, और दर्ज़ी से लेकर किताबफ़रोश तक. ईद का दिन जैसे-जैसे क़रीब आता जाता है, यहाँँ की हलचलोंं में इज़ाफ़ा होता जाता है. रौनक़ों, रौशनी और ख़ुशबुओं से गुलज़ार इन्हीं इलाक़ों की मुख़्तसर झलकियाँ.
फ़ोटोग्राफ़र | राजिंदर अरोड़ा