नई दिल्ली | इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में सोमवार की शाम को अरुंधति राय अपने पाठकों और प्रशंसकों से रूबरू हुईं. यह मौक़ा उनकी ताज़ा किताब ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ पर बातचीत का था. इस ख़ास मौक़े पर उन्होंने कहा, इस किताब में [….]
‘सहर’ — यानी भोर, उजाले की पहली आहट. ज़रा इस मंज़र की कल्पना कीजिए. आप एक किताब के लोकार्पण समारोह में बैठे हैं. किताब, हिंदुस्तान के बीसवीं सदी के बड़े शायर की उर्दू जीवनी का अंग्रेज़ी अनुवाद है. हॉल में उनकी लिखी फ़िल्मी और ग़ैर-फ़िल्मी ग़ज़लें धीमे-धीमे तैर रही हैं. बड़े से मंच के दोनों ओर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर एक संजीदा चेहरा बार-बार उभरता है. एक ऐसा [….]