रविवार , 4  दिसंबर  2022

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जन्मदिन पर शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी को याद किया

  • 19:37:PM
  • 30 September 2022

प्रयागराज | उर्दू के मशहूर आलोचक, शायर और उपन्यासकार शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के जन्मदिन पर बेहद आत्मीयता के साथ उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया गया. हेस्टिंग्स रोड के उनके घर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार उदयन बाजपेयी और मशहूर दस्तानगो-लेखक महमूद फ़ारूक़ी ने शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के अद्भुत व्यक्तित्व और ज्ञान की चर्चा की.

उदयन वाजपेई ने शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के फ़ारसी-उर्दू, संस्कृत साहित्य में उनके विरले ज्ञान की चर्चा करते हुए कहा कि शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी ऐसे विलक्षण बुद्धिजीवी और रचनाकार थे, जो खुद में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और वैदिक ज्ञान एवं दर्शन परंपरा के संगम थे. श्री वाजपेई ने उनकी अंतिम कृति ‘फ़ानी बाक़ी’ पर विस्तार से बात की.

मशहूर दास्तानगो और फ़ारूक़ी साहब के भतीजे महमूद फ़ारूक़ी ने उनकी ज़िंदगी के विभिन्न पहलुओं से रुबरु कराया. महमूद फ़ारूक़ी के शागिर्दों दास्तानगो पूनम गिरधानी और नुसरत अंसारी ने इस मौक़े पर महताब जादू की क्लासिक दास्तान सुनाई.

श्रीमती पद्मा श्रीवास्तव, डॉ ज़रीना बेगम ने फ़ारूक़ी साहब की ग़ज़लें ‘चेहरे का आफ़ताब दिखाई न दे तो फिर…’, ‘उनका ख़्याल हर तरफ़ उनका जमाल हर तरफ़…’ गाकर ख़ूब समां बांधा. अतिथियों का स्वागत प्रो.बारां फ़ारूक़ी और संचालन महमूद फारूकी ने किया.

कार्यक्रम में प्रो.बद्री नारायण, प्रो.संजय दत्ता रॉय, प्रो.प्रणय कृष्ण डॉ.बसंत त्रिपाठी, डॉ अर्चना सिंह, डॉ.शिशिर सोमवंशी, असरार गांधी, डॉ.लक्ष्मण गुप्ता, क्रांति शुक्ला, स्मृति रॉय, डॉ.उमेश चंद्रा, अमितेश कुमार, डॉ.सूर्य नारायण, स्मृति रॉय और प्रवीण शेखर समेत फ़ारूक़ी साहब के तमाम प्रशंसक उपस्थित रहे.



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