मंगलवार , 5  मार्च  2024

24 परगना में रानीगाछी कैंप के अधीक्षक के दस्तख़त से जारी उस सर्टिफिकेट पर 19 नवम्बर 1956 की तारीख़ दर्ज है. भुड़िया कॉलोनी के निकुंज भौमिक उस सर्टिफिकेट को बड़ी हिफ़ाज़त से रखते हैं और ख़ुद ही बनाया हुआ वह दोतारा, मन आने पर जिसे बजाकर वह भजन गाते हैं. वह काग़ज़ दूसरे मुल्क में उनके होने का वैधानिक सबूत है मगर वह उन दुर्दिनों की याद भी है, जिसमें उन्हें अपना गांव-घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा. तकलीफ़ और संघर्ष के बहुत से दिनों की याद है, नई पीढ़ी जिससे एकदम अनभिज्ञ है. निकुंज उन बेशुमार लोगों में से एक हैं, जो देश के बंटवारे के वक़्त पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिम बंगाल आ गए थे. शरणार्थी कैंप में आठ साल गुज़ारने के बाद सरकार ने बरेली ज़िले में 160 परिवारों को जहां ज़मीनें देकर बसाया, उसे भुड़िया कॉलोनी कहा गया. भुड़िया कॉलोनी में रहने वालों की ज़िंदगी की कुछ छवियां.
फ़ोटोः प्रभात

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