रविवार , 23  जून  2024

सन् 2018 में मुझे बोनस एरेस में कुछ दिन ठहरने-घूमने का मौक़ा मिला. स्पेनिश मुझे आती नहीं, और अर्जेंटीना के लोग अंग्रेज़ी या तो बोलते नहीं या फिर बोलना नहीं चाहते है. फ़ॉकलैंड की लड़ाई वो अभी तक भूले नहीं हैं और अमेरिका को पसंद नहीं करते, और उन के लिए, दोनों का अंग्रेज़ी से रिश्ता है, शायद इस लिए. किसी भी सफ़र में मेरा ज़्यादातर वक़्त स्थानीय लोगों से गप मारने में ही गुज़रता है, मगर अफ़सोस कि इस यात्रा में गपबाज़ी का सुख ग़ायब-सा ही रहा. इसी सब के बीच, मैं कपोराल्स से रु-ब-रु हुआ.

एक शाम यूँ ही सड़कें नापता हुआ मैं घर लौट रहा था, कि बैंड की आवाज़ सुनी और उस तरफ़ मुड़ गया. वहाँ ‘बोलीविया डे’ जैसा कुछ चल रहा था और बैंड के साथ ‘डांस ग्रुप्स’ की लंबी परेड. एक के बाद एक नर्तकों के समूह चले आ रहे थे. हर समूह के साथ एक म्यूज़िकल बैंड था, और उन के बाद रंग-बिरंगी पोशाकों में नर्तक. अद्भुत ऊर्जा से भरे वे लोग कूदते, पैरों को ज़ोर से मारते और मुस्कुराते हुए नाच रहे थे. ऐसा नृत्य मैंने कभी न देखा, न ही जाना था. यह सब देखते रहने के काफ़ी देर बाद मुझे होश आया कि मेरे पास कैमरा है, और मुझे इस मौक़े की कुछ तस्वीरें बना लेनी चाहिए. वैसे तो पेशे से मैं फ़ोटोग्राफ़र हूँ, फिर भी फ़ोटो लेना मेरे लिए हमेशा मुश्किल काम होता है, लगता है मैं किसी का एक पल चुरा रहा हूँ. और यहाँ पर तो भाषा का साथ भी नहीं था, कि पूछ सकूं या इजाजत ले सकूँ. एक लड़का मेरे हाथ में कैमरा देख कर, अचानक सामने पोज़ करके खड़ा हो गया. उस का ग्रुप डांस कर रहा था, और वह फ़ोटो खिंचाने के लिए रुक गया. मुझे लगा कि वह कह रहा है, “फ़ोटो लोगे या नहीं?” बस फिर क्या था, मैं और मेरा कैमरा उन के साथ नाचने-से लगे. मैं बस कैमरा उनकी तरफ़ करता और कोई न कोई डांसर या बैंड वाला मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरा देता, और पोज़ बनाकर खड़ा हो जाता, मेरा काम केवल बटन दबाना था. फ़ोटोग्राफ़ी की पढ़ाई में बताया गया था कि सब्जेक्ट का कैमरा में देखना ग़लत है. फोटो स्वाभाविक नहीं लगती, अगर सब्जेक्ट कैमरे की तरफ़ देख रहा हो. लेकिन मेरे लिए उन लोगों का मुझे या कैमरे को देखना उनसे एक रिश्ता जुड़ने-सा लगता रहा. उस दिन भाषा को कोई कमी नहीं महसूस हुई मुझे. हमने बग़ैर किसी शब्द के ख़ूब बतकही की.

कपोराल्स बोलीविया का पॉपुलर और सबसे नया डांस फॉर्म है. इसका पहला प्रदर्शन 1969 में हुआ था. वैसे तो बोलीविया अपने लोकनृत्य और संगीत के लिए मशहूर है, लेकिन कपोराल्स उन सबमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. यह नृत्य परेड चलते हुए करते है, जिसे बोलीविया के अफ़्रीकन और स्थानीय आदिवासी गुलाम प्रथा की कहानी की झलक की तरह देखा जा सकता है. कपोराल्स, खदान की देवी (वर्जिन ऑफ़ सोकाबोन) के सम्मान में किया जाता है. कपोराल्स पुरुष और महिला के अलग समूह में और साथ में चलने वाले म्यूजिक बैंड के साथ परफ़ॉर्म किया जाता है. हालांकि आदमी के साथ औरतों का नाचना काफ़ी सामान्य है.

पुरुष एक हाथ में टोपी और दूसरे में चाबुक ले कर नाचते है. टोपी खदान के फोरमैन पहनते थे और चाबुक हमेशा उन के हाथ में होता था. चाबुक में हो या न हो, फोरमैन हैट हमेशा बाएं हाथ में ही होती है. डांसर्स के जूते भी फोरमैन वाले होते हैं, और उन में बड़ी-बड़ी घंटिया लगी होती हैं, जो ग़ुलामों की जंज़ीरो की आवाज़ की प्रतीक हैं.
फोरमैन अफ़्रीकन और स्थानीय लोगों की मिश्रित प्रजाति के होते थे, लेकिन खदान में काम करने वाले ग़ुलाम, अफ़्रीकन या फिर स्थानीय आदिवासी थे. कपोराल्स ने इन सब का अद्भुत मेल है. इस नृत्य और संगीत दोनों में अफ़्रीकन और स्थानीय तत्त्व घुले-मिले है.

जहाँ पुरुषों के नृत्य में बहुत उछल-कूद और मुश्किल स्टेप्स हैं, वहीं औरतों का कपोराल्स अपेक्षाकृत आसान है. औरतों की ड्रेस भी “मेल-गेज़” का ही नमूना मानी जा सकती हैं. सभी डांसर्स एक जैसी ड्रेस पहनती है, मिनी स्कर्ट, नकली चोटी के साथ गोल टोपी, स्टॉकिंग्ज़, हाई हील और मैचिंग के अधोवस्त्र भी. उतनी ऊंचाई पर इतनी तेज़ गति और लय का नृत्य करने वाले मेरी नज़र में ओलंपिक चैंपियन से कम नहीं.

टेक्स्ट और फ़ोटो स्टोरी |अपल

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