रात हो चुकी थी, वैसे भी मैं वहाँ देर से पहुँच था. ख़ुदा का घर बंद हो चुका था और ताला ‘अंदर’ से लगा था. उसके साथ सटे हुए बंगले में मौज-मस्ती का आलम था. मैं बस बाहर से ही नमस्ते कर आगे बढ़ने ही लगा था कि उस घर के रास्ते ने मुझे सोचने पर और यह तस्वीर लेने पर मजबूर कर दिया. उस तक पहुँचने के लिए इस सँकरे रास्ते नें मुझे [….]