गाड़ी तेज़ी से भाग रही थी. सामने दूर तक फैली हुई डामर की चमकती हुई पट्टी, किनारों पर भागते पेड़, और बीच-बीच में नीले बोर्ड जिन पर लिखा था-एनएच 44, यानि नेशनल हाइवे 44.
गुड़गांव से चंडीगढ़ की ओर जाते हुए एक पल ऐसा आया जब सड़क ने मुझे [….]
प्रयागराज | वीथिका की ओर से हुए साहित्यिक आयोजन ‘पीढ़ियां’ में देश के विख्यात साहित्यकार और आलोचक शामिल हुए. साहित्यकारों की तीन पीढ़ियों पर केंद्रित वीथिका का यह कार्यक्रम इतवार को इलाहाबाद संग्रहालय में हुआ. इस विशिष्ट आयोजन में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, लेखन प्रक्रिया के बारे में बात [….]
बचपन का भी वो बहुत पहला और कच्चा-सा हिस्सा था, जब न ‘सराय’ का मतलब पता था, और न ही यह मालूम था कि ‘रोहिल्ला’ होता क्या है. उस वक़्त की यादें भी कैसे बची हैं, ये सोच कर भी मैं हैरान हूँ. दिल्ली के सराय रोहिल्ला स्टेशन से हमारा घर कुल चार सौ मीटर पर था. घर के पास से बहुत-सी रेल लाइन गुज़रती थीं जिन पर से रेलगाड़ी [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन के 81वें स्थापना दिवस पर शनिवार शाम को आयोजित ‘सहयात्रा उत्सव’ में समकालीन साहित्य और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार-विमर्श हुआ. इस अवसर पर ‘भविष्य के स्वर’ विचार-पर्व के छठे संस्करण में पाँच युवा वक्ताओं—कलाकार उन्नति चौधरी, शोधार्थी-अध्येता पंकज कुमार, कवि पराग [….]
वैलेंटाइन डे से ठीक तीन दिन पहले, दिल्ली-एनसीआर की एक बीस-बाईस बरस की लड़की ने “हाउ टू किस” की क्लास का ऐलान किया—फ़ीस दो हज़ार रुपये प्रति व्यक्ति. आधे घंटे की “लाइव क्लास”. लड़के-लड़कियाँ, आमने-सामने. जो सीखना चाहें — “चूमने का हुनर”.
पता चला है कि हज़ार से ज़्यादा नौजवानों ने नाम लिखवा दिया. मगर “उस्तानी” [….]
मुम्बई | किताब उत्सव के चौथे दिन पंडित अमरनाथ के काव्य-संग्रह ‘हंसा के बैन’ और गंगाशरण सिंह की संपादित किताब ‘युगसारथी धर्मवीर भारती’ का लोकार्पण हुआ. गुलज़ार और निदा फ़ाज़ली के संग्रह पर बातचीत हुई और राग-रंग की महफ़िल सजी. राजकमल प्रकाशन समूह की ओर से पाँच दिन का यह उत्सव पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी [….]
मुम्बई | राजकमल प्रकाशन की ओर से महाराष्ट्र कला अकादमी में आयोजित किताब उत्सव का तीसरा दिन नई किताबों के लोकार्पण, गंभीर चर्चाओं और रोचक प्रस्तुतियों से भरा रहा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की पटकथा और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर केंद्रित विश्वास पाटील की उपन्यास शृंखला ‘महासम्राट शिवाजी’ के दूसरे खंड का [….]
मुम्बई | पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में राजकमल प्रकाशन की ओर से आयोजित पाँच दिन के किताब उत्सव के दूसरे दिन गिरीश कारनाड की आत्मकथा के हिन्दी संस्करण ‘खेल-खेल में बीता जीवन’, दुष्यंत के नए उपन्यास ‘दालचीनी’ और असग़र वजाहत के नए उपन्यास ‘बानुसनामा’ का लोकार्पण हुआ. प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल [….]