फीफा विश्व कप 2026 का एक और दौर समाप्त हुआ. प्री-क्वार्टर फ़ाइनल के आठ मैच पूरे हुए. इस तरह कुल 104 मैचों में से 97 मैच इतिहास में दर्ज़ हुए. अपने टूटे सपनों को बटोरे 40 टीमें इस महासमर से विदा हुईं. शेष बचे सात मैचों में फ़ुटबॉल का नया [….]
नई दिल्ली | दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का कल शाम लोकार्पण हुआ. गुरुदत्त की ज़िंदगी और उनके समय के भारतीय सिनेमा की गहरी पड़ताल करती यह किताब राजकमल प्रकाशन से छपी है. यह कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में 18वें हैबिटेट फ़िल्म फ़ेस्टिवल के दौरान आयोजित एक विशेष सत्र में हुआ. [….]
4 फ़रवरी, 2010. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का न्यू गेस्ट हाउस. पर्शियन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा मसनवी पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के तीसरे सत्र के बाद का समय. डाइनिंग हॉल में भारत के सुदूर इलाक़ों से एवं ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, तज़ाकिस्तान, बांग्लादेश से बड़ी संख्या में आए प्रतिभागी. सब तरफ चर्चाएं, खिलखिलाहटें, बातें ही बातें. बड़ी मुश्किल और कोशिश के बाद जैसे-तैसे हम [….]
लखनऊ | भारतीय समकालीन कला के परिदृश्य में छापाकला (प्रिंटमेकिंग) एक सशक्त, संवेदनशील और वैचारिक माध्यम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है. शहर की कोकोरो आर्ट गैलरी में छह मई से शुरू हुई नामवर छापाकार मनोहर लाल भुगरा की कृतियों की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी “छापा… जीवन की छाप (Imprint of a lifetime)” इसी विशिष्टता को रेखांकित करती है. यह [….]
मैं फ़ोटोग्राफ़र होने का कोई दावा नहीं करता, न ही हूँ. हाँ, इतना ज़रूर है कि ज़िंदगी ने मुझे कुछ नामी फ़ोटोग्राफ़रों के क़रीब बैठने का मौक़ा दिया, जिनकी सोहबत में मैंने तस्वीर को देखना और समझना सीखा—कभी उनकी बातों से, कभी उनकी ख़ामोशियों से. वही लोग थे जिन्होंने मुझे बार-बार समझा कर ठीक-ठाक तस्वीर लेने का हौसला दिया और [….]