फीफा के रंग | गुलाबी भी मुक़ाबले में

किसी भी प्रतियोगिता के दौरान अनेक ऐसे दृश्यों और क्षणों की निर्मिति होती है जो लोगों की स्मृति का एक बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं. वे इतने प्रभावशाली होते हैं कि लोगों की स्मृति में हमेशा के लिए चस्पां हो जाते हैं. और जीत से निर्मित दृश्य या क्षण पृष्ठभूमि में चले जाते हैं या खो जाते हैं. अगर आप फीफा विश्व कप का इतिहास उठाकर देखेंगे तो पता लगेगा कि विश्व कप के सबसे यादगार पल वे शायद ही कभी होते हों जिनमें कोई टीम ट्रॉफी उठाती है. विश्व कप 2026 भी शायद ही इसका अपवाद बने.

1950 में माराकांजो त्रासदी, 1994 में रॉबर्टो बैजियो द्वारा ब्राजील के ख़िलाफ़ चूका गया पेनल्टी शॉट, 1986 में माराडोना का हैंड ऑफ़ गॉड गोल और गोल ऑफ़ सेंचुरी, 2006 में जिनेदिन ज़िदाने का हेड बट, 2014 में ब्राजील की सेमीफाइनल में जर्मनी से 1-7 हार जिसे कितने ही क्षण हैं जो जीत से ज्यादा स्मृति में जगह घेरते हैं और कहीं गहरे पैठ जाते हैं.

प्रतियोगिता का पहला चरण लीग स्टेज समाप्त हो चुका है. 48 में से 12 टीमें घर वापस जा चुकी हैं. और नॉक आउट स्टेज की 32 टीमें और उनके 16 मुक़ाबले तय हो चुके हैं. फीफा विश्व कप के इस पहले चरण (लीग स्टेज) के समाप्त होते न होते ख़ूबसूरत और शक्तिशाली दृश्यों की निर्मिति हो चुकी है, जो लोगों के ज़ेहन में उतर चुके हैं.

एक

प्रतियोगिता शुरू होने से पहले इसकी सफलता पर कई प्रश्नचिह्न लगे थे. अनेक विवादास्पद मुद्दे, उनका विरोध और प्रतियोगिता के बायकॉट की अपील, कड़े आव्रजन नियम, टिकट घोटाला व टिकटों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम और उत्तरी अमेरिका की भीषण गर्मी जैसे कुछ ऐसे कारण थे, जिनकी वजह से इसकी सफलता को संदेह की नज़र से देखा जा रहा था. लेकिन फ़ुटबॉल की लोकप्रियता ने इन सभी कारणों को बहुत पीछे छोड़ दिया और अमेरिका में इस आयोजन ने लोकप्रियता के नए मानक स्थापित किए.

16 जून को विश्व कप के इतिहास में किसी एक दिन में स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों की संख्या का एक नया रिकॉर्ड बना, 32 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर. उस दिन उपस्थित दर्शकों की संख्या 2.81 लाख थी. उसके छह दिन बाद 22 जून को चार स्टेडियमों में दर्शकों की कुल संख्या 2.88 लाख तक पहुंच गई. ये इस महाआयोजन की सफलता के सबसे प्रामाणिक प्रतिमान हैं.

स्टेडियमों के भीतर ही नहीं बाहर भी इसी तरह के दृश्य बने. टीमों के समर्थकों ने मैच के आयोजन शहरों में शानदार मार्च के अद्भुत दृश्यों की निर्मिति की. इन शहरों की सड़कों के दौड़ती भागती जिंदगी के नीरस उबाऊ दृश्यों को इन भाग लेने वाली टीमों के समर्थकों ने उत्साह उमंग और जोश के रंगीन नजारों में बदल दिया. फीफा अधिकारियों के अनुसार केवल पहले चरण की समाप्ति के बाद इन फ़न फ़ेस्टवल में भाग लेने वाले समर्थकों की संख्या 20 लाख के पार हो गई है. यह आश्चर्यचकित कर देने वाला आंकड़ा है.

दो

मैदान से बाहर जो दृश्य दर्शक अपने उत्साह और ज़ुनून से बना रहे थे, मैदान में वही काम खिलाड़ी अपने खेल से कर रहे थे. इस बार पहली बार इतनी बड़ी संख्या में टीमें विश्व कप फ़ाइनल्स में भाग ले रही हैं. 32 के मुकाबले इस बार 48 टीमें भाग ले रहीं हैं. आशंका थी कि इससे बहुत सारी कमज़ोर टीमों की भागीदारी होगी और इसका असर खेल की गुणवत्ता और प्रतियोगिता की साख और स्तर पर पड़ेगा. पर ये आशंका निर्मूल सिद्ध हुई.

इस विश्व कप की अब तक की सबसे सुंदर कहानी केप वर्डे की टीम ने लिखी. केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 सोलोमन द्वीप एक ख़ूबसूरत देश. आबादी केवल पांच लाख. उसने अपने पहले ही मैच में स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलकर दुनिया को विस्मित कर दिया. 40 साल के गोलकीपर वोज़िन्हा गोल के सामने चट्टान की तरह खड़े हो गए कि स्पेन की एक नहींं चली. उन्होंने सात बचाव किए. वे राष्ट्रीय हीरो बन गए और पूरी दुनिया उनकी फ़ैन. इंस्टा पर उनके फ़ॉलोअर्स की संख्या अब 50 हजार से बढ़कर 17 मिलियन हो गई है.

दुनिया को लगा शायद ये एक संयोग हो. तब अगला मैच उरुग्वे के ख़िलाफ़ 2-2 से ड्रॉ खेला. केविन पिना ने भी 31 मीटर की दूरी से शानदार फ्री किक लगाकर देश का पहला विश्व कप गोल दागा और हेलियो वारेला ने बेंच से आकर दूसरे हाफ़ में बराबरी का गोल दागा. और उसके बाद सऊदी अरब से गोल रहित ड्रॉ. अपने ग्रुप में दूसरा स्थान और पहले ही विश्व कप में नॉक आउट में दौर में. ये छोटे से देश द्वारा लिखी गई फ़ुटबॉल की एक बड़ी सी कहानी है.

एक और केवल डेढ़ लाख की आबादी और 444 किलोमीटर वर्ग में फैले छोटे से ख़ूबसूरत कैरेबियन द्वीप कुराकाओ ने भी खेल के सुंदर दृश्य रचे. कुराकाओ ने टूर्नामेंट की शुरुआत जर्मनी से 1-7 से हार के साथ की थी. उस मैच में ही पहले हाफ़ में स्कोर 1-1 था. उसने विश्व कप के पहले ही मैच में अपना पहला विश्व कप गोल किया. उसके बाद इक्वेडोर से अपना मैच गोलरहित ड्रॉ खेला. लेकिन कुराकाओ के लिए यह ड्रॉ भी ऐतिहासिक था. विश्व कप का पहला अंक अर्जित किया. ये उनके गोलकीपर एलॉय रूम का मैच था. एलोय रूम ने अपने खेल से कुराकाओ को मैच में बनाए रखा और टीम को ड्रॉ हासिल करने में मदद की. उन्होंने रिकॉर्ड 15 बचाव किए.

मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराया. मिस्र की ये जीत इस मायने में ऐतिहासिक थी कि देश को विश्व कप में पहली जीत हासिल करने के लिए 92 साल इंतजार करना पड़ा था. इस जीत में लिवरपूल के मोहम्मद “मो” सलाह ने अहम भूमिका निभाई थी.

पहले दौर में ईरान के प्रदर्शन की चर्चा जरूर की जानी चाहिए. वे शत्रु देश में बहुत ही कठिन परिस्थितियों में खेल रहे थे जिन्हें फीफा से कोई मदद नहीं मिल रही थी. वे भले ही अगले दौर के लिए क्वालीफाई ना कर पाए हों लेकिन इतनी कठिन और होस्टाइल परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन अच्छा ही कहा जाएगा. उन्होंने बेल्जियम से गोलरहित ड्रॉ खेला. इसके अलावा मिस्र से 1-1 से और न्यूजीलैंड से 2-2 से ड्रॉ खेला. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईरान को एक भी मैच न हारने के बावजूद ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. यह उस टीम के लिए एक दुखद अंत था जिसने बहादुरी से संघर्ष किया. कभी कभी भाग्य भी बहादुरी का साथ नहीं देता है.

ईरान की टीम को मैक्सिको के तिजुआना में बेस कैंप बनाना पड़ा था क्योंकि अमेरिका ने अपने यहां रुकने की अनुमति नहीं दी थी. जबकि उसके सारे मैच अमेरिका में थे और मैचों के लिए उसे लंबी यात्राएं करनी पड़ रही थी. कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के देश में प्रवेश पर कथित तौर पर रोक लगा दी गई है.

इस सबके बावजूद सोफ़ी स्टेडियम में बेल्जियम के साथ 0-0 से ड्रॉ के बाद ईरान ने अपने व्यवहार से प्रशंसकों का दिल जीत लिया. रवाना होने से पहले ईरान ने लॉस एंजिल्स के आतिथ्य सत्कार के लिए और अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए लॉकर रूम में एक हस्तलिखित नोट छोड़ा “हम गर्व के साथ लॉस एंजिल्स आए, सम्मान के साथ प्रतिस्पर्धा की और गरिमा के साथ विदा हो रहे हैं.” इसी खेल भावना से खेल खेल रह पाते हैं.

विश्व कप के शुरुआत में एशियाई देशों ने अच्छा खेल दिखाया. पहले कई दिन कोई भी एशियाई टीम अपना मैच नहीं हारी. लेकिन जैसे जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी एशियाई टीम पिछड़ती गईं. एशियाई फ़ुटबॉल महासंघ से नौ टीमें ने विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन केवल जापान और ऑस्ट्रेलिया ही नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रहे. ग्रुप स्टेज मंए जापान एशियाई फ़ुटबॉल का सबसे सकारात्मक पक्ष रहा. कोच हाजिमे मोरियासु की जापानी टीम ने ग्रुप एफ में 5 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया. उसने ट्यूनीशिया को 4-0 हराया और नीदरलैंड के साथ 2-2 से और स्वीडन से 1-1 से ड्रॉ खेला. अब राउंड ऑफ 32 में “ब्लू समुराई” का मुकाबला ब्राजील से होगा. दूसरी टीम ऑस्ट्रेलिया की है.

एशियाई टीमों के विपरीत अफ्रीकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया है और 10 अफ्रीकी टीमों में से 9 टीमें अगले दौर में पहुंच गई हैं. दक्षिण अमेरिका की 6 में से 5 टीमें, यूरोप की 16 में से 13 टीमें और CONCACAF क्षेत्र की छह में से तीन टीमों ने नॉकआउट दौर में पहुंची हैं. यहां उल्लेखनीय है कि तीनों सह मेज़बान देश अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको अगले दौर में पहुंच गए हैं.

तीन

अगर विश्व का सबसे बड़ा खेल आयोजन हो रहा है और इसमें विश्व की सबसे बेहतरीन टीमें भाग ले रही हैं तो ज़ाहिर है कि दुनिया भर के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी और प्रतिभाओं का जमावड़ा भी वहां होगा ही. सारी दुनिया की निगाहें इन पर और इनके प्रदर्शन पर लगी रहेंगी. ये सिर्फ अपने राष्ट्र की उम्मीदों का बोझ लिए ही यहाँ नहीं आते हैं,बल्कि दुनिया भर के प्रशंसकों की उम्मीदों का भार भी अपने कंधों पर धरे आते हैं. लेकिन ये दबाव उन्हें और अधिक अच्छा करने की प्रेरणा देता है. वे इस बोझ तले दब नहीं जाते. यही बात उन्हें महान बनाती हैं. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी उम्मीदों और दबाव के बोझ तले नहीं दबते, बल्कि वे इसका भरपूर आनंद लेते हैं.

इस प्रतियोगिता में शामिल सभी महान खिलाड़ी यथा लियोनेल मेस्सी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, किलियन म्बाप्पे, एर्लिंग हालैंड, हैरी केन, विनीसियस जूनियर, लामिन यामल, माइकल ओलिस ऐसा ही कर रहे हैं. ये सारे सितारे यहां ज़बरदस्त खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ ने शानदार शुरुआत की. कुछ की शुरुआत थोड़ी फीकी रही. और कुछ को कड़ी मेहनत करनी पड़ी.

सबसे पहले बात मेस्सी की. वे अपना छठवां विश्व कप खेल रहे हैं. यूँ तो उनका पिच पर होना भर ही उनके चाहने वालों के लिए पर्याप्त होता,क्योंकि उनको लोग इस प्रतियोगिता में अंतिम बार देख रहे हैं. लेकिन फ़ुटबॉल का ये जादूगर अविश्वसनीय रूप से कमाल दर कमाल किए जा रहा है. मेस्सी ने 2026 के विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत अल्जीरिया के ख़िलाफ़ एक शानदार हैट्रिक के साथ की. फिर मज़बूत ऑस्ट्रियाई टीम के ख़िलाफ़ दो गोल दागे. दो मैचों में पांच गोल. जॉर्डन के विरुद्ध वे पूरे समय खेल कर अपने आंकड़ों को और अधिक अविश्वसनीय बना सकते थे. लेकिन मेस्सी अपने आप में अकेले हैं. उन्होंने युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी. वे साठ मिनट के बाद पिच पर आए और फ्री किक से एक शानदार गोल कर पुनः अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की. वे इस इस विश्व कप में अब तक तीन मैचों में छह गोल कर चुके हैं. विश्व कप में कुल 19 गोल. विश्व कप के लगातार सात मैचों में गोल. उनकी ये एक बेमिसाल शुरुआत है. याद रखें कि मेस्सी 39 साल के हैं और वे विश्व के सबसे बड़े मंच पर अपने खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं.

शानदार शुरुआत करने वाले अन्य सितारे हैं— किलियन म्बाप्पे, एर्लिंग हालैंड और हैरी केन. इन सभी ने अपने शुरुआती मैचों में दो-दो गोल दागे. घाना के ख़िलाफ़ इंग्लैंड के गोल रहित ड्रॉ में केन गोल करने में नाकाम रहे, वहीं म्बाप्पे और हालैंड ने इराक और सेनेगल के ख़िलाफ़ अपनी-अपनी जीत में दो-दो गोल दागकर शानदार प्रदर्शन जारी रखा. लेकिन ओलिसे ने अभी तक गोल नहीं किया है, पर निसंदेह वे फ्रांस के लिए शादर खेल दिखाया है. वे फ्रांसीसी आक्रमण की सबसे मज़बूत कड़ी हैं. डेंबेले ने भी नॉर्वे के ख़िलाफ़ शानदार हैट्रिक की.

दूसरी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लामिन यामल ने पहले मैच में कमज़ोर शुरुआत के बाद वापसी की. डीआर कांगो से मैच 1-1 से ड्रॉ के बाद रोनाल्डो आलोचनाओं का शिकार हुए. लेकिन अगले मैच में दो गोल दाग कर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए. इसी तरह या ने भी केप वर्डे के ख़िलाफ़ कमज़ोर शुरुआत कर अगले मैच में अच्छा प्रदर्शन किया.

मोरक्को के ख़िलाफ़ 1-1 से ड्रॉ में विनीसियस जूनियर ने शानदार प्रदर्शन कर गोल कर एक महत्वपूर्ण अंक दिलाया. इसके बाद विनी ने हैती के ख़िलाफ़ भी उसी लय को बरकरार रखा और एक गोल करने के साथ-साथ एक बेहतरीन असिस्ट भी किया.

इस पहले चरण में स्टार खिलाड़ी अपने रंग में आ चुके हैं. और अगले दौर के लिए अपने पैरों का जादू दिखाने को तैयार हो रहे हैं.

चार

ये चरण गुलाबी रंग में रंगा नज़र आया. गुलाबी रंग को सामान्यतः लड़कियों के साथ जोड़ा जाता है. लेकिन इस विश्व कप में ये रंग अपना जलवा बिखेर रहा है. अब इसे अघोषित रूप से इसे विश्व कप का आधिकारिक रंग माना जा रहा है. जूते बनाने वाले सभी प्रमुख कंपनियों नाइकी, एडिडास, प्यूमा सभी ने इस विश्व कप में अपने नए कलेक्शन लॉच किए हैं और सभी ने खिलाड़ियों को गुलाबी रंग के जूते उपलब्ध कराए हैं. यही कारण है कि इस समय ज्यादातर टीमों के खिलाड़ी चमकीले गुलाबी रंग के जूतों में नज़र आ रहे हैं. और फ़ुटबॉल मैदान गुलाबी रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं. इन टीमों में इंग्लैंड, जापान, अर्जेंटीना, पुर्तगाल, फ्रांस और मेज़बान यूएस की टीम भी शामिल हैं. हालांकि मेस्सी सफ़ेद जूतों में ही नज़र आ रहे हैं.

दरअसल बरसों के शोध और मार्केटिंग अनुभव के बाद लगभग सभी जूते बनाने वाली कंपनियां इस निष्कर्ष पर पहुँची हैं कि फ़ुटबॉल मैदान पर ब्राइट पिंक अन्य किसी भी रंग के मुक़ाबले अधिक प्रभावी होते हैं. क्योंकि घास के हरे रंग के कंट्रास्ट में पिंक कलर टीवी, मोबाइल पर हर जगह अधिक चमकता और ध्यान खींचता है.

बस अब देखना है कि नॉक आउट में ये पिंक किसे सूट करता है. कौन जीत की पिंकी आभा लिए आगे बढ़ता है और किसके चेहरे हार की टीस से मलिन हो अपनी गुलाबी आभा खो बैठेंगे.

पांच

विश्व कप का सबसे विवादास्पद नियम हाइड्रेशन ब्रेक विश्व कप के इस पहले चरण में फ़ुटबॉल खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के बीच सबसे चर्चित विषय बना रहा. इस बार दोनों हाफ़ में एक हाइड्रेशन ब्रेक का प्रावधान किया गया है. दरअसल इसके पीछे असल मकसद विज्ञापनों के लिए समय निकालना है. लेकिन इस ब्रेक का सबसे बड़ा नुक़सान ये है कि इससे खेल की रिद्म, उसकी लय भंग होती है. खिलाड़ियों की भी और दर्शकों की भी. विवाद का विषय ये इसलिए बना कि इस ब्रेक को वहां भी दिया जा रहा है जहां इसकी ज़रूरत नहीं है. जहां मौसम अपेक्षाकृत काफी ठंडा है. विशेषज्ञों का मानना है कि पहले तो इसे दिया ही नहीं जाना चाहिए. अगर दिया भी जाए तो वहां जहां मौसम काफी गर्म है. यानी, जब मौसम और परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो ही हाइड्रेशन ब्रेक लेना समझदारी भरा कदम है. लेकिन वैंकूवर जैसे स्थानों पर जहाँ तापमान 17 डिग्री के आस पास रहता है, इस ब्रेक का क्या ही औचित्य हो सकता है.

खेलों के बारे में नेल्सन मंडेला का एक बहुत प्रसिद्ध कथन है, “खेलों में लोगों को इस तरह एकजुट करने की शक्ति है जैसी शायद ही किसी और चीज में हो.” स्टेडियमों के अंदर और बाहर से जिस तरह की ख़ूबसूरत तस्वीरें आ रही हैं, वे मंडेला के कथन की पुष्टि करती प्रतीत होती हैं. दुनिया के कोने-कोने से अपनी टीमों के समर्थन में लोग इन तीन मेज़बान देशों में आ रहे हैं जिसमें हर धर्म, नस्ल, देश और उम्र के लोग शामिल हैं. यहां वे मेज़बान देशों की सांस्कृतिक विशेषताओं का आनंद उठा रहे हैं है, आत्मसात कर रहे है, जश्न मना रहे हैं. आज के युद्धग्रस्त और विभाजित दुनिया में इसी की ज़रूरत है.

फिलहाल फीफा विश्व कप के 17 दिन के इस पहले चरण ने भविष्य की पीठ पर शानदार फ़ुटबॉल खेल की इबारत लिख दी है. जिसे अगले चरण में किसी महाकाव्य में बदल जाना है.

कवर | इंस्टाग्राम के सौजन्य से.

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