पॉल लिंच की ‘प्रॉफेट सॉन्ग’ को बुकर पुरस्कार

  • 5:05 pm
  • 28 November 2023

आयरलैंड के लेखक पॉल लिंच को उनके नॉवेल ‘प्रॉफेट सॉन्ग’ के लिए 2023 का बुकर पुरस्कार दिया गया है. पुरस्कार के रूप में 50 हजार पाउंड दिए जाते हैं. यह एक परिवार और एक देश की कहानी है, जो अचानक निरंकुश हो चुके शासन के कारण बर्बादी के कगार पर पहुंच जाता है. पश्चिमी देशों के अशांत लोकतंत्र और उनकी समान त्रासदी पर यह लिंच का पांचवां उपन्यास है. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने लिखा है कि पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लिंच ने कहा कि यह उपन्यास लिखना आसान नहीं था. क्योंकि मेरी चेतना का एक हिस्सा कह रहा था कि यह उपन्यास लिखकर मैं अपना करियर बर्बाद करने जा रहा हूं. चार बच्चों की मां का अपने परिवार को निरंकुश शासन से बचाने की कहानी के हवाले से यह किताब भविष्य के आयरलैंड की तस्वीर पेश करती है. उन्होंने बताया कि 2018 में शुरू किए गए इस उपन्यास को पूरा करने में चार साल लगे. यह प्रतितथ्यात्मक उपन्यास है, किसी पैगंबर की भविष्यवाणी नहीं. मैं चाहता था कि पाठक शासन के बढ़ते आतंक के जरिए निरंकुशतावाद और मेरे लेखन के यथार्थ को ठीक से समझ सकें.

विपिन रावत की जिसमें मौत हुई उस हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जांच रोकी
पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की मौत जिस हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुई थी उसकी अब जांच तमिलनाडु पुलिस ने रोक दी है. 8 दिसंबर 2021 को नीलगिरि जिले में कुन्नूर के निकट हुई दुर्घटना में जनरल रावत की पत्नी मधुलिका रावत और 12 अन्य अफसर मारे गए थे. कुन्नूर पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की थी और जांच कर रही थी. आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण उस दिन जारी वेदर क्लियरेंस रिपोर्ट और हेलीकॉप्टर फ्लाइट और कॉकपिट वॉयस रिकार्डर डाटा न मिलने की वजह से जांच को लंबित कर दिया गया है. ‘द हिंदू’ ने एक जांचकर्ता के हवाले से खबर दी है कि वायुसेना के सुलूर एयर बेस के अधिकारियों ने सैन्य गोपनीयता के कारण मांगे गए विवरण उपलब्ध कराने से मना कर दिया है. बेस के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को वायु सुरक्षा निदेशालय से संपर्क करने को कहा है. कुन्नूर पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही थी जिनके कारण दुर्घटना हुई. इसमें खराब मौसम एक बड़ा कारण माना जा रहा था. हेलीकॉप्टर सुलूर एयर फोर्स स्टेशन से उड़ा था और कोयम्बटूर के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उतरने से कुछ ही मिनट पहले गहरी घाटी में गिर गया था.

रोहतांग दर्रा की ओर गाड़ियों के जाने पर रोक
बर्फ देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह निराश करने वाली खबर है. संबंधित विभाग द्वारा खराब मौसम की चेतावनी और यलो अलर्ट जारी किए जाने के बाद मनाली प्रशासन ने रोहतांग पास जाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है. एसडीएम मनाली रमन कुमार शर्मा ने बताया कि अगले आदेशों तक कोठी से आगे वाहनों की जाने पर रोक रहेगी. प्रतिबंध की समीक्षा की जाएगी लेकिन निर्णय मौसम को देखते हुए ही लिया जाएगा. सामान्यतया 15 नवंबर के बाद रोहतांग पास पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी जाती है. इस साल मौसम अनुकूल रहने के कारण 26 नवंबर तक वाहनों को जाने की अनुमति दी गई. ‘द ट्रिब्यून’ की खबर के मुताबिक, रोहतांग रोड बंद होने से पर्यटक अटल टनल और लाहौल-स्पीति जिले के कोकसर पहुंच रहे हैं. यहां पर्यटकों को हल्की बर्फबारी देखने को मिली जिससे उनमें खुशी है.

दो हजार से ज्यादा के डिजिटल लेन-देन में लगेंगे चार घंटे
ऑनलाइन पेमेंट में होने वाले फ्रॉड से बचाने के लिए सरकार दो लोगों के बीच होने वाले तय राशि तक के पहले डिजिटल भुगतान का न्यूनतम समय तय करने पर विचार कर रही है. डिजिटल भुगतान की सीमा दो हजार रुपये से ज्यादा होने पर समय चार घंटे हो सकता है. यह जानकारी सरकारी अधिकारियों ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दी है. आवश्यक साइबर स्क्रूटनी के बाद इसमें कुछ और चीजें जोड़ी जा सकती हैं. ये नियम आईएमपीएस, आरटीजीएस और यूपीआई पेमेंट पर लागू होंगे. चार घंटे की यह समय सीमा सिर्फ पहले पेमेंट पर लागू होगी जब भी कोई यूपीआई यूजर किसी नए व्यक्ति को भुगतान करेगा. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दरअसल भुगतान करने वाले के पास ये चार घंटे पेमेंट रद्द करने, वापस लेने या परिवर्तन के काम आएंगे. संबंधित उद्योगों से बात करने के बाद छोटे पेमेंट जो आम तौर पर राशन आदि खरीदने पर किए जाते हैं, को इस समय सीमा प्रतिबंध से बाहर रखा गया है.

37 साल बाद खिसकने लगी है मुंबई से छह गुना बड़ी बर्फ की चट्टान
साल 1986 में अंटार्कटिका से टूटकर अलग हुई दुनिया की सबसे बड़ी बर्फ की चट्टान (आइसबर्ग) ने 37 साल स्थिर रहने के बाद खिसकना शुरू कर दिया है. यह आइसबर्ग मुंबई शहर (करीब 603 वर्ग किलोमीटर) से छह गुना बड़ा, 4000 वर्ग किलोमीटर में फैला और एक लाख टन वजनी है. इसकी ऊंचाई चार सौ मीटर है. सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यह अब तेज हवा और धाराओं के सहारे अंटार्कटिका प्रायद्वीप के उत्तरी सिरे की ओर तेजी से बढ़ रहा है. ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा है कि पर्यावरण विज्ञानी आइसबर्ग के खिसकने को समुद्री जीवों, जहाजों, पेंगइन, सील, छोटे द्वीपों आदि के लिए बड़े खतरे के रूप में देख रहे हैं. संभावना है कि यह फिर से दक्षिण जार्जिया द्वीप पर जमींदोज हो जाए. ऐसा हुआ तो यह अंटार्ककटिका में जीवन के लिए बड़ी समस्या पैदा करेगा.

चयन-संपादन | शरद मौर्य


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