नई दिल्ली | अरुंधति रॉय की बहुचर्चित किताब ‘मदर मेरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन से छपकर आ रहा है. इसका हिन्दी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है. किताब का लोकार्पण 18 जुलाई 2026 को पटना [….]
नई दिल्ली | दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का कल शाम लोकार्पण हुआ. गुरुदत्त की ज़िंदगी और उनके समय के भारतीय सिनेमा की गहरी पड़ताल करती यह किताब राजकमल प्रकाशन से छपी है. यह कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में 18वें हैबिटेट फ़िल्म फ़ेस्टिवल के दौरान आयोजित एक विशेष सत्र में हुआ. [….]
लखनऊ | भारतीय समकालीन कला के परिदृश्य में छापाकला (प्रिंटमेकिंग) एक सशक्त, संवेदनशील और वैचारिक माध्यम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है. शहर की कोकोरो आर्ट गैलरी में छह मई से शुरू हुई नामवर छापाकार मनोहर लाल भुगरा की कृतियों की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी “छापा… जीवन की छाप (Imprint of a lifetime)” इसी विशिष्टता को रेखांकित करती है. यह [….]
संवाद बुकशेल्फ़ | ऐसे में जब शहरी लैंडस्केप से किताबों की दुकानें ग़ायब होती जा रही हैं और ऑनलाइन ठिकाने या प्रकाशक ही किताबें ख़रीदने का अकेला ज़रिया बनते जा रहे हैं, यह स्तंभ हिंदी और अंग्रेज़ी की नई-पुरानी किताबों से आपका परिचय कराने और उनके बारे में मुख़्तसर जानकारी देने की कोशिश है. इनमें संपादक की पसंद की किताबें भी शामिल होंगी. पढ़ने वालों की सहूलियत के लिए [….]
मुम्बई | ऋत्विक घटक बांग्ला सिनेमा के उन महान फ़िल्मकारों में हैं, जिन्होंने बंगाल विभाजन की पीड़ा, विस्थापन, शरणार्थी जीवन और सामाजिक विघटन को अपनी फ़िल्मों में गहरी संवेदना और वैचारिक तीक्ष्णता के साथ चित्रित किया. उनका सिनेमा यथार्थवाद, मेलोड्रामा, ब्रेख़्तियन शैली, मिथकीय प्रतीक और अभिव्यक्तिवादी ध्वनि के अनोखे संयोजन के [….]
सहमत की पुरानी साथी विदुषी नीला भागवत का लंबी बीमारी के बाद कल 14 अप्रैल 2026 को इंतकाल हो गया. वह ग्वालियर घराने की एक मशहूर कलाकार थीं. उन्हें न सिर्फ़ अपनी परंपरा से गहरा लगाव था, बल्कि वह उसमें नए प्रयोग करने की महारत भी रखती थीं. नीला जी अपने आस-पास की दुनिया और समाज से बहुत क़रीब से जुड़ी हुई थीं. उनकी इस [….]
प्रयागराज | वीथिका की ओर से हुए साहित्यिक आयोजन ‘पीढ़ियां’ में देश के विख्यात साहित्यकार और आलोचक शामिल हुए. साहित्यकारों की तीन पीढ़ियों पर केंद्रित वीथिका का यह कार्यक्रम इतवार को इलाहाबाद संग्रहालय में हुआ. इस विशिष्ट आयोजन में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, लेखन प्रक्रिया के बारे में बात [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन के 81वें स्थापना दिवस पर शनिवार शाम को आयोजित ‘सहयात्रा उत्सव’ में समकालीन साहित्य और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार-विमर्श हुआ. इस अवसर पर ‘भविष्य के स्वर’ विचार-पर्व के छठे संस्करण में पाँच युवा वक्ताओं—कलाकार उन्नति चौधरी, शोधार्थी-अध्येता पंकज कुमार, कवि पराग [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन अपनी स्थापना के 81वें वर्ष में प्रवेश के मौक़े पर 28 फरवरी की शाम ‘सहयात्रा उत्सव’ का आयोजन कर रहा है. इस मौक़े पर ‘भविष्य के स्वर’ विचार-पर्व का छठा संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें पाँच युवा प्रतिभाएँ अपने व्याख्यान देंगी. विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले [….]
मुम्बई | किताब उत्सव के चौथे दिन पंडित अमरनाथ के काव्य-संग्रह ‘हंसा के बैन’ और गंगाशरण सिंह की संपादित किताब ‘युगसारथी धर्मवीर भारती’ का लोकार्पण हुआ. गुलज़ार और निदा फ़ाज़ली के संग्रह पर बातचीत हुई और राग-रंग की महफ़िल सजी. राजकमल प्रकाशन समूह की ओर से पाँच दिन का यह उत्सव पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी [….]
मुम्बई | राजकमल प्रकाशन की ओर से महाराष्ट्र कला अकादमी में आयोजित किताब उत्सव का तीसरा दिन नई किताबों के लोकार्पण, गंभीर चर्चाओं और रोचक प्रस्तुतियों से भरा रहा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की पटकथा और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर केंद्रित विश्वास पाटील की उपन्यास शृंखला ‘महासम्राट शिवाजी’ के दूसरे खंड का [….]
नई दिल्ली | इंडिया हैबिटैट सेंटर में आईएचसी समन्वय-2026 के साथ ही तीन दिन के महोत्सव की शुरुआत हुई. यह उत्सव आठ फ़रवरी तक चलेगा. उद्घाटन कार्यक्रम ने इस वर्ष के संस्करण की वैचारिक दिशा तय की, जिसका केंद्र भारत के प्राकृतिक परिदृश्यों और उसकी सांस्कृतिक व साहित्यिक परंपराओं के बीच के गहरे और सतत संबंधों पर है [….]
मुम्बई | पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में राजकमल प्रकाशन की ओर से आयोजित पाँच दिन के किताब उत्सव के दूसरे दिन गिरीश कारनाड की आत्मकथा के हिन्दी संस्करण ‘खेल-खेल में बीता जीवन’, दुष्यंत के नए उपन्यास ‘दालचीनी’ और असग़र वजाहत के नए उपन्यास ‘बानुसनामा’ का लोकार्पण हुआ. प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल [….]