तमाशा मेरे आगे | एक क़ब्रिस्तान जहाँ ख़ुशी बसती है

  • 12:31 pm
  • 15 February 2026

मौत में भी ख़ुशी? हाँ, रोमानिया के इस ख़ास क़ब्रिस्तान में मौत सिर्फ़ ग़मी का मंज़र नहीं ज़िंदगी की हल्की हंसी भी है. घुमक्कड़ यायावर, फ़ोटोग्राफ़र और प्यारे दोस्त हिमांशु जोशी ने पिछले हफ़्ते रोमानिया की अपनी यादें और तस्वीरें साझा कीं, जिन्हें मैंने कुछ इस तरह पिरोया है.

कौन कहता है कि शोक से हटकर मौत का कोई हल्का-फुल्का पहलू नहीं हो सकता? दुमित्रु पॉप तो बिल्कुल नहीं मानते. क़रीब पचास सालों से वो मौत की डरावनी अटल सच्चाई का दर्द ढाँक कर उसमें थोड़ी राहत भी जोड़ रहे हैं. उत्तरी रोमानिया के कुल 5,000 लोगों के छोटे से क़स्बे में, चर्च ऑफ़ द असम्पशन के पीछे एक अनोखा क़ब्रिस्तान है, जिसका नाम है सिमितिरुल वेसेल – The Merry Cemetery. इसे Cemetery of Happiness भी कहा जाता है – यानी मस्त क़ब्रिस्तान. यह नाम इसे एक ख़ास वजह से मिला है क्योंकि यहाँ हर क़ब्र पर भारी, ठंडे पत्थर की जगह एक जीवंत, ख़ूबसूरती से तराशी गई लकड़ी की सलीब लगी है, जो चमकते आसमानी के नीले रंग में रंगी हुई है. यहाँ सलीबों पर तस्वीरों की नक्काशी की गई है और हर क़ब्र के सर-पत्थर को कुछ ख़ास शब्दों से नवाज़ा गया है जो उस क़ब्र में हमेशा के लिए रहने वाले की ज़िंदगी के बारे में कुछ कहते हैं. इन शब्दों या कविताओं में कुछ शरारत भरी मज़ेदार हैं, कुछ सनकी क़िस्म की तो कुछ दिल दहला देने वाली हैं, जो दुर्घटनाओं या बीमारियों से असमय कटी ज़िंदगियों की कहानियाँ कहती हैं.

मैं इसे “द मेरी सेमिटेरी” न कह कर ‘मस्त क़ब्रिस्तान’ कहता हूँ जो रोमानिया के मारामुरेश काउंटी के सपान्ता गाँव में है. यह अपने चटकीले रंगों वाले क़ब्र के पत्थरों और मक़बरों के लिए मशहूर है जिन पर बनी पेंटिंग्स भोली-भाली सी दिखती और उन पर लिखे जुमले मज़ाकिया तरीक़े से वहाँ दफ़्न लोगों की ज़िंदगी का ब्योरा देते हैं. कहा जाए तो मस्त क़ब्रिस्तान एक तरह का खुला अजायबघर या म्यूज़ियम और राष्ट्रीय पर्यटक आकर्षण है जो टूरिज़्म रोमानिया की वेबसाइट पर विशेष आकर्षण के तौर पर दर्ज है. इसे रोमानिया के ‘सात अजूबों में से एक’ के रूप में भी माना जाता है.

इस क़ब्रिस्तान की ख़ासियत यह है कि ये दुनियावी ढर्रे और प्रचलित धारणा से हटकर है, जो मौत को अमिट रूप से गंभीर मानती है. मस्त क़ब्रिस्तान के शिलालेखों का एक संग्रह 2017 में क्रूसाइल दे ला सपान्ता नाम की किताब में मौजूद है जिसे लेखिका रोक्साना मिहाल्सिया ने संकलित किया है, साथ ही इसी क़ब्रिस्तान पर पीटर कायाफ़ास द्वारा द मेरी सेमेट्री ऑफ़ सपान्ता नामक एक फ़ोटोग्राफ़ी पुस्तक भी है.

क़ब्रिस्तानों में उदासी की एक अनदेखी लकीर-सी खींची होती है लेकिन मैं क़ब्रिस्तानों को उदास जगहें नहीं मानता. मौत से बड़ा सच शायद कुछ भी नहीं है – ये वो अटल होनी है जो जन्म से हमारे साथ चलती है. मेरा मानना है कि अपने आप में मौत कोई गंभीर मामला नहीं है. मस्त क़ब्रिस्तान, जिसे “दुनिया का सबसे ख़ुश क़ब्रिस्तान” भी कहा जाता है इसी श्रेणी में आता है. पश्चिमी परंपराओं की गंभीरता के विपरीत यहाँ चमकीले नीले मक़बरे सच्ची कविताओं से सजे हैं जो बताती हैं कि लोग कैसे जिए और कैसे मरे, बस.

डेशियन लोग इस इलाक़े के मूल निवासी थे जो आत्मा की अमरता में विश्वास करते थे. उनके लिए मौत बेहतर ज़िंदगी के दूसरी तरफ परम ख़ुशी से भरा क्षण माना जाता था. डेशियन संस्कृति ही शायद इस रंग-बिरंगे क़ब्रिस्तान की प्रेरणा रही होगी. इतिहास के जनक माने जाने वाले ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस ने अपनी किताब द हिस्टरीज़ में डेशियनों लोगों के बारे में कहा है, ‘युद्ध में निडर और मरते समय प्रसन्न रहने वाले ये लोग अपने देवता ज़ाल्मोक्सिस से मिलने के लिए हँसते हुए अपनी क़ब्रों की ओर जाते हैं.’

इस क़ब्रिस्तान में बने बलूत (ओक) की लकड़ी के शिलापट्ट स्टान पात्रास नाम के कारीगर ने बनाए हैं. 1935 से ले कर 1977 तक अपनी मृत्यु के बीच उन्होंने आठ सौ से अधिक स्मारक पट्टियाँ तराशीं जिनमें एक ‘उनकी अपनी’ भी है. उन्होंने इन स्मारकों को जीवंत चटख़ रंगों में रंगा. इस रंगीन क़ब्रिस्तान में प्रमुख रंग हैं गहरा नीला जो सपान्ता के आकाश का है, ये आशा और आजादी की बात करता है. हरा यहाँ के कृषि जीवन का प्रतिनिधित्व करता है, पीला सूर्य के तेज का, लाल जुनून का, और काला मृत्यु का. इन कृतियों में बने सफ़ेद कबूतर आत्मा का प्रतीक हैं और काली चिड़िया मृत्यु का संकेत देती है.

इन पर बनी बहुत-सी तस्वीरें तो बस रोज़मर्रा की ज़िंदगी के दृश्य दिखाती हैं — खेतों में काम करते मर्द, घर में जुटी औरतें; या फिर वो चीज़ें जो मरने वाले को प्यारी थीं — परिवार, दोस्त, जानवर, शराब. भले ही आप रोमानियाई भाषा न जानते हों, पर सलीब पर बनी सादी-सी तस्वीरें अपनी कहानियाँ ख़ुद-ब-ख़ुद बयान कर देती हैं. एक तस्वीर में एक पादरी बैठा है, जो ईर्ष्या भरी निगाहों से पास की मेज़ पर मौज-मस्ती करते लोगों को देख रहा है; दूसरी में एक अध्यापक अपनी मेज़ पर काम कर रहा है मगर चोरी-चोरी कमरे के उस पार बैठी एक औरत की ओर नज़रें दौड़ा रहा है.

पात्रास ने क़ब्र की सलीबों पर वहाँ रहने वालों के चित्र और भोली-भाली तस्वीरें तराशीं जो उनके रहन सहन को भी दर्ज करती हैं. नक़्क़ाशियों के नीचे पात्रास ने जो शिलालेख लिखे हैं वो ऐसे हैं जैसे क़ब्रों के निवासी अपनी ज़िंदगी की कहानियाँ ख़ुद सुना रहे हों. कुछ ऐसे भी हैं जो मरने वाले के नज़दीकी ने उनकी प्रशंसा करने या गुणों से उन्हें लादने के बजाय उन्हें सनकी बताते हुए चतुराई भरी तुकबंदियाँ, उनकी ख़ुशमिज़ाजी और बेफ़िक्री के साथ उनकी ग़लतियों, कमियों, कमज़ोरियों, दोषों, ख़ामियों, नाकामियों और बेवफ़ाइयों को भी दर्ज किया है.
आज दुमित्रु पॉप उस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं जो 1930 के दशक में उनके गुरु स्टान पात्रास ने शुरू की थी जिन्होंने 1977 में ये काम दुमित्रु को सौंपा था. आज जब उस गाँव में कोई मर जाता है तो परिवार वाले दुमित्रु के पास आते हैं और उनसे एक सलीब बनाने को कहते हैं, जिसे वो अपने घर के पीछे चर्च के सामने बनी छोटी-सी कोठरी में हाथ से तराश कर बनाते हैं. छोटी-छोटी कलाकृतियाँ के साथ पॉप ही तय करते हैं कि तस्वीर में क्या दिखेगा और उस पर लिखी पंक्तियाँ क्या कहेंगी.

कुछ शिलालेख मौत की वजह भी बताते हैं यहाँ तक कि मौत के तरीके, डूबना, दारू पीना, झगड़ा, ख़ुदकुशी और कार दुर्घटना आदि. वो शख़्स जिनकी हत्या हुई और जिन्हें बिना सिर के दफ़नाया गया वो भी क़ब्रिस्तान के माहौल को दर्दनाक बनाने में नाकामयाब रहते हैं.
शिलालेखों पर तराशी कविताएँ अपमानजनक नहीं हैं — वे क़ब्र या उसमें दफ़्न व्यक्ति का मज़ाक नहीं उड़ातीं — लेकिन उनमें से कुछ – बेवफ़ाइयों, ग़लतियों और शराब के शौक की मज़ेदार कहानियाँ सुनाती हुई – बेबाक ज़रूर लगती हैं. आप कहेंगे कि मरने वाले के रिश्तेदारों को बुरा लग सकता है, लेकिन ऐसा भी नहीं है. वेबसाइट पर दिए एक इंटरव्यू में पॉप कहते हैं. “ये इंसान की असली ज़िंदगी है. अगर उसे पीना पसंद है, तो तुम वही कहते हो; अगर उसे काम करना पसंद है, तो वही कहते हो… छोटे शहर में छिपाने को कुछ नहीं होता,” पॉप आगे कहते हैं, “किसी ने कभी मुझसे शिकायत नहीं की. परिवार वाले दरअसल चाहते हैं कि सलीब पर उस इंसान की सच्ची ज़िंदगी दर्शाई जाए.”

सलीबों पर पंक्तियाँ या कविताएं ऐसे लिखी गई हैं कि उन्हें पढ़ने पर ऐसा लगता है जैसे हम सामने किसी से बातचीत कर रहें हों. और यक़ीनन ऐसा महसूस होता है कि किसी न किसी तरीक़े से हमने उस इंसान को जान लिया है. मसलन ये: “मैं यहाँ आराम कर रहा हूँ. स्टेफ़ान है नाम मेरा. जब तक जिया, पीना पसंद था. जब मुझे बीवी छोड़ गई मैंने और ज्यादा पी क्योंकि मैं उदास था. फिर और ज़्यादा पी ताकि मैं ख़ुश हो जाऊँ. क्योंकि मेरी बीवी मुझे छोड़ गई तो मैं इतना बुरा भी नहीं था, पी सका मैं दोस्तों के साथ. ख़ूब पी मैंने, और अब भी, प्यासा हूँ. जो मेरी इस विश्रामगाह पर आए तो थोड़ी शराब यहाँ छोड़ जाएं.”

फिर भी इनमें एक क़ब्र है जो निरंतर खुशमिज़ाजी को तोड़ती है. वो है तीन साल की लड़की के लिए लिखी कविता जिसे एक टैक्सी ने मार गिराया था:
ओ टैक्सी चालक!
जा, तू नरक में जले,
तुझे पूरे रोमानिया में
कोई और जगह न मिली
तुझे बस यहीं,
हमारे घर के पास रुकने
और मुझे मारने के लिए
और मेरे माँ-बाप को
ग़म देने आना था. वो
जब तक जिएँगे
मेरे लिए रोएँगे,
जा तू नरक में जले.

एक रोचक कविता है जो किसी आदमी ने अपनी सास के सम्मान में लिखी है जो कुछ इस तरह है:
इस भारी सलीब (क्रॉस) के नीचे लेटी हैं मेरी बेचारी सास,
वो तीन दिन और जी लेतीं तो मैं यहाँ लेटा होता, और वो ये शिलालेख पढ़ रही होती.
अरे भाई, जो भी यहाँ से गुजर रहा हो, प्लीज़ इसको डिस्टर्ब मत करना
ये वापस घर आ गईं तो बिना रुके मेरी क्लास ले लेगी!
पर मैं प्रामिस करता हूँ कि मैं अच्छा बिहेव करूँगा ताकि ये क़ब्र से वापस न आएँ.
यहीं रहो ना मेरी प्यारी सासू माँ ! अब तो आराम करो, और मुझे भी जीने दो!

यहाँ तक कि रोमानिया के रूखे और कड़े कम्युनिस्ट शासक भी इस क़ब्रिस्तान के मज़े में शामिल होना चाहते थे. एक पुराने पार्टी कामरेड की क़ब्र पर बनी कृति में वो मेज़ पर बैठा दिखाया गया है, हाथ में लाल हथौड़ा-दरांती का निशान उठाए हुए, उनका शिलालेख कहता है: “जब तक जिया “पार्टी” से मोहब्बत की और सारी उम्र लोगों की भलाई में लगा रहा.

लेखक पीटर कायाफ़ास ने 2007 में इस क़ब्रिस्तान में बनी क़ब्रों की तस्वीरों की सुंदर किताब भी प्रकाशित की थी. इस क़ब्रिस्तान (मेरी सेमेट्री) की अपनी वेबसाइट भी है जिस पर यहाँ दफ़न लोगों की कब्रों के बारे में और जानकारी भी मिल सकती है.

इस क़ब्रिस्तान में कब्रों की तस्वीरों का संग्रह इस वेबसाइट पर मिल सकता है.

(सभी तस्वीरें विकिपीडिया से साभार)

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