यह ख़बर किताबों के शौक़ीनों के लिए है. एक नवम्बर को छपकर आई तीन खण्डों की किताब ‘द सिस्टीन चैपल’ की कुल 1,999 प्रतियाँ छपी हैं, इसमें 600 प्रतियाँ अंग्रेज़ी में हैं. यह ऐसी किताब है, जिसका रीप्रिंट कभी नहीं छपेगा. [….]
मैं चुप रहा आता तो वे न जाने कब तक सुनाते जाते. यूँ सृजन के सुख में आकंठ डूबे एक रचनाकार की मुद्रा-भंगिमाएँ देखने का आनंद भी तो कम ख़ास नहीं होता पर…. तब मैं काज़ी साहब के लेखन में उपमाओं, रूपकों, कल्पनाओं और अतिश्योक्तियों के प्रयोगों को लेकर उठाए गए कुछ सवालों और आपत्तियों के बारे में सोच रहा था. [….]