कुछ कहानियां ऐसी हैं, जिनके बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए दोस्तों से अक्सर कहता हूं, ‘तुम एक साथ दो कहानियां नहीं पढ़ सकते.’ दरअसल यह उन कहानियों की ताक़त और उनके असर के बयान का यह मेरा तरीक़ा है. मंटो और गुलज़ार को भी पढ़ते हुए मैं हमेशा ऐसा ही महसूस करता हूं. [….]