फीफा | आख़िरी सीटी बजने तक खेल चालू मानें
क्रिकेट खेल को सबसे ज्यादा अनिश्चितताओं का खेल कहा गया है कि जब तक आख़िरी बॉल न फेंक दी जाए तब तक कोई परिणाम तय नहीं समझना चाहिए. लेकिन इन दिनों रात-रात भर जागकर फ़ुटबॉल देखने वाले कहेंगे ये बात तो फ़ुटबॉल के खेल पर भी उतनी ही लागू होती. कि फ़ुटबॉल का कोई भी परिणाम उस समय तक तय नहीं माना जा सकता जब तक कि मैच समाप्ति की सीटी न बज जाए.
एक
बुधवार को फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ़ 32 में अटलांटा स्टेडियम में इंग्लैंड का मुक़ाबला कांगो डीआर से था. मैच में इंग्लैंड फेवरिट था. लेकिन कांगो के खिलाड़ियों ने शुरूआत ही आक्रामक रुख़ अपनाया. सात मिनट बीतते बीतते बायन सिपेंगा को बॉक्स के बाएं फ्लैंक में एक पास मिला और उनका शानदार ग्राउंडेड शॉट इंग्लैंड के एक डिफ़ेंडर और गोली की छकाते हुए गोल के जाल में जा धंसा. कांगो डीआर ने एक गोल की बढ़त से इंग्लैंड की टीम को ही नहीं पूरे स्टेडियम को सकते में डाल दिया.
अगले 68 मिनट इंग्लैंड की आक्रामक पंक्ति का कांगो डीआर के गोलकीपर लियोनेल म्पासी के बीच मुक़ाबला था. इस दौरान इंग्लैंड विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़ी अपमानजनक हार से बचने के लिए लगातार आक्रमण कर रही थी और गोलकीपर लियोनेल म्पासी कांगो की ऐतिहासिक जीत के लिए प्रतिबद्ध गोल के सामने अभेद्य दीवार बने खड़े थे. इस 68 मिनट के समय में उन्होंने इंग्लैंड को रोकने के लिए कई शानदार बचाव किए.
कांगो एक इतिहास रचने और इंग्लैंड एक अपमानजक हार से केवल 15 मिनट की दूरी पर थे कि कप्तान हैरी केन ने 75 वें मिनट में गार्डन के क्रॉस पर हेडर से गोलकर स्कोर 1-1 कर दिया. उसके बाद भी लगा कि मैच एकस्ट्रा टाइम में जा रहा है कि 86वें मिनट में हैरी केन ने मैच का एक और गोल दाग दिया. केन ने बॉक्स के किनारे पर गेंद को अपने क़ब्ज़े में लिया, घूमे, आगे बढ़े और अपने दाहिने पैर से जोरदार शॉट लगाकर म्पासी को पछाड़ते हुए इंग्लैंड को बड़े संकट से उबार लिया.
बिल्कुल किनारे आकर कांगो डी आर की नाव डूब गई. एक सपना दुःस्वप्न में बदल गया. एक इतिहास बनते-बनते रह गया.
अगर अभी भी फ़ुटबॉल की अनिश्चितता में कोई संदेह हो तो फिर सिएटल में हुए बेल्जियम और सेनेगल के बीच हुए मैच को देखना चाहिए.
बेल्जियम अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहा था,जबकि सेनेगल की टीम अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही थी और तीसरे स्थान पर रहने वाली शीर्ष आठ टीमों में होने के कारण नॉक आउट दौर में पहुंची थी.
मैच में बेल्जियम को संभावित विजेता माना जा रहा. था. लेकिन मैच में पहले बढ़त सेनेगल ने बनाई, हबीब डियारा के 25वें मिनट में किए गए गोल से. इसके बाद दूसरे हाफ़ के छह मिनट बाद इस्माइला सार ने टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन गोलों में से एक गोलकर सेनेगल की बढ़त को दोगुना कर दिया.
सेनेगल ने मैच के अधिकांश हिस्से में दबदबा बनाए रखा और बेल्जियम का अप्रत्याशित रूप से टूर्नामेंट से बाहर होना तय लग रहा था. अब सेनेगल की जीत केवल चार मिनट दूर थी कि 86वें मिनट में स्थानापन्न बेल्जियम के रोमेलु लुकाकू ने गोल करके अंतर कम किया. इस गोल के महज तीन मिनट बाद, 89वें मिनट में यूरी टिलेमैन्स ने बराबरी का गोल दागकर मैच को अतिरिक्त समय तक पहुंचा दिया.
अब पेनल्टी शूटआउट से कुछ ही सेकंड पहले, अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में टिलेमैन्स को पेनल्टी बॉक्स के अंदर गिरा दिया गया. वीएआर समीक्षा के बाद, रेफ़री ने बेल्जियम को पेनल्टी दी. टिलेमैन्स ने अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में गोल दाग दिया. बेल्जियम ने ये मुक़ाबला 3-2 से जीत लिया.
बेल्जियम का ये तीसरा गोल फीफा विश्व कप के इतिहास में सबसे देर से किया गया गोल था और ये मुक़ाबला प्रतियोगिता के सबसे यादगार नॉकआउट मुक़ाबलों में से एक.
दो
यह सेनेगल के दुर्भाग्य का अकेला उदाहरण नहीं था. दुर्भाग्य है कि मानो उसका साया बन उसके साथ क़दमताल कर रहा हो.
इस वर्ष के अफ्रीका कप ऑफ़ नेशंस के फ़ाइनल में सेनेगल ने मेज़बान मोरक्को को हरा दिया था. लेकिन बाद में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ अफ्रीकी फ़ुटबॉल के अपील बोर्ड ने सेनेगल से ख़िताब छीनकर मोरक्को को विजेता घोषित कर दिया. इसके पीछे का मुख्य कारण यह था कि मैच के अंतिम क्षणों में विवादास्पद पेनल्टी दिए जाने के विरोध में सेनेगल की टीम और कोच ने लगभग 15 मिनट के लिए मैदान छोड़ दिया था, जो कि नियमों के ख़िलाफ़ था.
इतना ही नहीं इससे भी पहले 2018 के विश्व कप में सेनेगल की टीम ग्रुप चरण के बाद ‘फेयर प्ले’ नियमों के आधार पर बाहर हो गई थी. ग्रुप में जापान और सेनेगल दोनों के चार चार अंक थे और गोल अंतर भी समान था. तो फैसला फेयर प्ले नियम के आधार पर हुआ जिसमें सेनेगल बाहर हो गया क्योंकि सेनेगल को जापान से अधिक येलो कार्ड मिले थे.
तीन
खेलों में भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख़राब प्रदर्शन के लिए अक्सर संसाधनों की कमी और सुविधाओं की कमी का रोना सुनाई देता है. लेकिन सेनेगल की टीम और उसका शानदार प्रदर्शन इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि परिश्रम, लगन, दृढ़ इच्छा शक्ति और पैशन हो तो संसाधनों की कमी भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती.
सेनेगल की टीम को संसाधनों के अभाव में विश्व कप से पहले और विश्व कप के दौरान बहुत सारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा है. विश्व कप के दौरान सेनेगल की फ़ुटबॉल टीम को समय पर वेतन न मिलने, घटिया होटल और ख़राब खाने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा. कोच पापे थियाव बिना किसी आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट के काम कर रहे थे और उन्हें छह महीनों तक उनका वेतन नहीं दिया गया. इसके अलावा अफ्रीका कप ऑफ़ नेशंस के फ़ाइनल मुकाबले में विरोध स्वरूप मैदान छोड़ने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई का दंश भी टीम पर भारी पड़ा. कोच समेत कई मुख्य खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने से टीम की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हुई.
इतनी सारी समस्याओं से जुझते हुए जो शानदार प्रदर्शन टीम ने दिखाया वो कमाल का है.
चार
विश्व कप के दौरान विभिन्न टीमों के समर्थकों और प्रशंसकों के मैच से पहले और जीत के बाद शानदार जश्न मनाते देखा है और उनके ख़ूबसूरत दृश्यों को भी. लेकिन जब यह जोश उन्माद में बदल जाता है तो कुछ बदरंग और भयावह तस्वीरें सामने आती हैं.
पहले नॉक आउट मैच में सह-मेज़बान मेक्सिको की टीम ने इक्वेडोर पर 2-0 से ऐतिहासिक विजय दर्ज की और चालीस साल बाद प्री क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचे. इसका जश्न मनाने के लिए एक साथ 14 लाख से ज्यादा लोग मेक्सिको सिटी की सड़कों पर आ गए. भीड़ में दम घुटने से टीम के तीन प्रशंसकों की मृत्यु हो गई.
फ़ुटबॉल विश्व कप दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन है और इसे वैश्विक सांस्कृतिक एकता का भी वाहक माना जाता है. लेकिन सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं भी फ़ुटबॉल के खेल में ही होती हैं. दरअसल जब जोश उन्माद बदल जाता है,सह अस्तित्व की भावना विद्वेष में बदल जाता है, वैश्विक भावना संकीर्ण राष्ट्रवाद में बदल जाती है और आपसी भाई चारा नस्लवाद में बदल जाता है, तो हिंसक घटनाएं जन्म लेती ही हैं. ये विश्व कप भी ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं रहा.
नॉक आउट दौर में जब मोरक्को ने नीदरलैंड को हराया तो हेग में कुछ हिंसक घटनाएं हुई. नीदरलैंड में बड़ी संख्या में मोरक्को के प्रवासी हैं, लगभग चार लाख. इसमें नीदरलैंड के हारने नीदरलैंड्स के कई शहरों में हिंसक झड़पें और उपद्रव हुए. मोरक्को की जीत के जश्न के दौरान हेग जैसे शहरों में भारी हिंसा भड़क गई, जिसके कारण पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा.
ये निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण है.
कवर | इंस्टाग्राम से साभार
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