बोल्ड एण्ड बैंकरप्ट | मस्ती अपनी जगह पर मर्म की कमी खलती है

  • 3:38 pm
  • 9 August 2020

महामारी के इस दौर में, जब दुनिया घूमने और लोगों को जानने के जज़्बे पर बंदिश है और घुमक्कड़ी पर ब्रेक लगा हुआ है, फ़िल्म-वेब सीरिज़ के स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स की तरह ही घुमक्कड़ों के व्लॉग भी ख़ूब देखे जा रहे हैं. पूरी दुनिया में घूमते रहे ये व्लॉगर अलग-अलग तहज़ीब के बारे में तजुर्बों के हवाले से बताते रहे हैं. मनोरंजन और हल्की-फुल्की जानकारी के लिहाज़ से ये वीडियो पहले से ही ख़ासे लोकप्रिय रहे हैं.

व्लॉगर्स अपनी वाक्-पटुता और भाव-भंगिमा से इन वीडियो को दिलचस्प बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं, चौंकाने वाले तथ्यों का समावेश करते हैं जो बहुसंख्य देखने वालों को नए लगें. और शायद यह बात वे भी अच्छी तरह समझते हैं कि खान-पान और ज़ायक़े के बारे में बातचीत पसंद करने वालों की तादाद बड़ी है तो बहुत बार वे स्ट्रीट फ़ूड के ठिकानों, बड़े रेस्तरां और बहुत बार लोगों के घरों की रसोई में कैमरे के साथ मौजूद दिखाई देते हैं.

‘बाल्ड एण्ड बैंकरप्ट’ ऐसे ही व्लॉगर्स का एक चैनल है, यूट्यूब सहित तमाम सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी दिखाई देती है. यूट्यूब पर इनके बीस लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और मिस्टर बाल्ड यानी बेन्जामिन रिच ब्रिटिश हैं. हिन्दुस्तान और कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे मुल्क़ों पर उनके तमाम वीडियो हैं. जिस मुल्क में और जिन लोगों के बीच होते हैं, काम चलाने भर को उनकी ज़बान सीखे रहते हैं. भारत पर उनके वीडियो में ‘कैसे हैं भाई साहब?’, ‘तो फिर तीन सौ रुपये मांग रहा था?’, ‘अस्सलाम वालैकुम’, ‘वो मेरा अंग्रेज़ दोस्त किधर है?’,‘ओहो, हनुमान जी!’ जैसे जुमले अक्सर सुनने को मिल जाते हैं. इसी तरह वह रूसी या कई बार आदिवासियों की ज़बान में बोलते हुए भी मिल जाते हैं.

अपने वीडियो में बेन्जामिन काफी ख़ुशमिज़ाज और खिलन्दड़े लगते हैं. लेखक भी हैं तो अपने विषय के बारे में पहले से तैयारी उनके आत्मविश्वास में झलकती है फिर भी कई बार ‘बाहरी’ होने का नज़रिया उनकी बातों में आता और खटकता भी है. कुछ अरसा पहले उनका जो पहला वीडियो मुझे देखने को मिला था – वह ‘टेन थिंग्ज़ आय हेट अबाउट इंडिया’ है. पृष्ठभूमि में बनारस के घाट और गंगा के बीच नाव पर बैठकर बना यह वीडियो ‘जै भोले की फ़्रॉम वारानसी’ के उद्घोष से शुरू होने वाले इस वीडियो में बेन्जामिन भारत की उन दस चीज़ों या कहें भारतीयों की दस प्रवृतियों के बारे में बात करते हैं, जो उन्हें नापसंद हैं. पहली नज़र में मुझे यह किसी फ़िरंगी टूरिस्ट का प्रलाप लगा था तो एकाध मिनट बाद इसे छोड़ दिया था. बाद में उनके दूसरे वीडियो देख लेने के बाद जब फिर इससे टकराया तो पूरा देखा. हिन्दुस्तान के ई-वीज़ा के लिए अर्ज़ी की दुरूह प्रक्रिया से बात शुरू करके पर्यटन वाली जगहों पर कूड़ा फैलाने, वोडाफ़ोन की इंटरनेट स्पीड और विलायती टूरिस्ट से लपकों या दलालों के व्यवहार तक पर वह पूरी संजीदगी से अपना तजुर्बा बयान करते हैं. यह वीडियो 19.59 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

भाषा को लेकर जैसा मैंने कहा, हिन्दुस्तान आने वाले विदेशियों को काम चलाने भर हिन्दी सिखाने के लिए भी बनारस के घाटों और गलियों में घूमते हुए उन्होंने एक वीडियो बनाया है. क़रीब आधे घंटे के इस वीडियो में वह अभिवादन से लेकर माफ़ी मांगने और सामान ख़रीदने के लिए ज़रूरी हिन्दी वाक्यांश का ब्योरा देते हैं. हिन्दी या हिन्दुस्तान के बारे में उनकी यह समझ विदेशियों को चमत्कार भी लग सकती है मगर जैसा मैंने कहा कि किसी तहज़ीब को जानना-समझना व्लॉगिंग के मुक़ाबले अलग उद्यम है. बेन्जामिन का अनुभव हिन्दुस्तान में रहने के दौरान इन वाक्यांश से बढ़िया काम चलाने का हो सकता है मगर मुंबई के चोर बाज़ार पर उनका एक और वीडियो मेरे इस नज़रिये को पुष्टि है कि दिन भर में तीन वीडियो फ़ीड करने का कौशल जगहों को जानना हरगिज़ नहीं है. वहां घूमते वक़्त कबाड़ की दुकान में रखी एक निर्वस्त्र मैनिकिन् पर कैमरा रोककर वह अंग्रेज़ी में बताते हैं – इसे देखिए, ख़ूबसूरत भारतीय नारी.

चेचन्या में रेलगाड़ी के सफ़र के दौरान एक चेचन महिला को लेकर की गई उनकी ऐसी ही टिप्पणी पर ख़ासा बखेड़ा खड़ा हो गया था. यह नवम्बर 2019 का वाक़या है. ‘बाल्ड एण्ड बैंकरप्ट’ के विकीपीडिया पेज पर दो लाइन में इसका ब्योरा है मगर ‘बाल्ड एण्ड बैंकरप्ट एक्सपोज़्ड’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर इस मसले पर एक वीडियो है, जिसमें बेन्जामिन को कैमरे के सामने माफ़ी मांगते हुए दिखाया गया है.

फरवरी, 2019 का एक और वीडियो दिल्ली के चोर बाज़ार का है, जिसमें दस रुपये के नोटों की माला गले में डालकर बेन्जामिन पूछते हैं – व्हेयर इज़ द थीफ़, चोर कहाँ है? इस वीडियो में हालांकि वह हिन्दुस्तान को टूरिस्ट के लिए मुफ़ीद और सुरक्षित जगह बताते हैं मगर साथ-साथ लोगों से पूछते चलते हैं – चोर कहाँ है या बाई साब डु यू वाँट माय मनी? अब अगर किसी जगह या बाज़ारों के ऐसे नाम पड़ जाने की रवायत का उन्हें अंदाज़ होता तो हिन्दुस्तान में सैलानियों की हिफ़ाज़त के बारे में बात करने का शायद वह कोई और ज़रिया चुनते, न कि गले में पड़े नोटों की माला के हवाले से.

यों दूसरे ढेर सारे ट्रेवल व्लॉगर्स के मुक़ाबले ‘बाल्ड एण्ड बैंकरप्ट’ इस लिहाज़ से भी बेहतर है कि ये लोग अपने वीडियो को दूसरों के विज्ञापन का ज़रिया बनाने से बचाए रखते हैं. उनकी कहन का तरीक़ा ज्यादा दिलचस्प और हल्का-फुल्का है. बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए ये बहुत जानकारीपरक हो सकते हैं, उन्हें चौकस रहने में भी मदद करते होंगे. फिर भी मस्ती अपनी जगह पर मर्म की कमी खलती है.

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