(कथाकार-आलोचक प्रेम कुमार की एक पहचान उनके साक्षात्कार भी हैं. हिंदी-उर्दू के बेशुमार यशस्वी लेखकों से उनके साक्षात्कार कृतित्व पर ही केंद्रित नहीं रह जाते, बल्कि शख़्सियत का बड़ा ख़ाका भी पेश करते हैं. साक्षात्कारों की इस सूची में उनके समकालीन [….]
सत्रह दिसंबर की रात सूफ़ी परंपरा में मातम की नहीं, विसाल की रात है. मौलाना जलालुद्दीन रूमी के लिए मौत कोई अंत नहीं, बल्कि माशूक़ से मुलाक़ात थी. मेरे लिए रूमी को याद करना, उनके लिखे को पढ़ना, उसे सुनाना हर बार नए शब्दों में लिखना—अपने दिल पे पड़े बोझ को हल्का करने जैसा होता है. रूमी की ज़िंदगी, इश्क़ का उनका फ़लसफ़ा, [….]
इतिहासकार इरफ़ान हबीब 94 साल के हो गए हैं. अपनी ज्यादातर सक्रियता उन्होंने घर के दायरे में सीमित कर ली है, पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग तक अब भी चले जाते हैं. विभाग के चेयरमैन प्रो.हसन इमाम की मेज़ के सामने एक बड़ी-सी मेज़ उनके आने के इंतज़ार में ख़ाली दिखाई देती है. यों घर की अपनी स्टडी में [….]
उर्दू के नामवर उपन्यासकार और कहानीकार पद्मश्री क़ाज़ी अब्दुल सत्तार की पैदाइश सीतापुर के मछरेहटा में हुई थी. डॉ.प्रेम कुमार से बातचीत में उन्होंने अपने बचपन के मोहर्रम की यादों का एक वाक़या तफ़्सील से बयान किया, जो दिलचस्प है और मर्मस्पर्शी भी. डॉ.प्रेम कुमार की किताब ‘बातों-मुलाक़ातों में क़ाज़ी अब्दुल सत्तार’ में दर्ज उसी बातचीत [….]
राफ़ेल नडाल टेनिस के सार्वकालिक महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं. महानतम इसलिए नहीं कि आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं बल्कि इसलिए भी कि वे टेनिस के खेल को इस क़दर प्रभावित करते है कि उनका नाम टेनिस खेल का पर्याय बन जाता है.
वे खेल में प्रतिद्वंद्विता की नई परिभाषा गढ़ते हैं, संघर्ष के नए पैमाने और [….]
वे बचपन के दिन हुआ करते थे जब हम भी चौंसठ ख़ानों की बिसात पर शह और मात के खेल के दीवाने होते थे. पर इससे पहले कि हम बिसात के मोहरों की चालों के उस्ताद हो पाते, उन चालों को सिखाने वाले उस्ताद पिता को सरकार ने किसी एक स्थान पर जमने न दिया और उनका साथ न मिलने के कारण हम शतरंज के खेल के उस्ताद बनते-बनते रह गए. [….]
(‘एक मस्त फ़कीरः नीरज’ गोपालदास नीरज की सर्जना के तरीक़े और उनकी फ़िक़्र को बेहतर ढंग से समझने की कुंजी भी है. इस किताब में डॉ. प्रेम कुमार ने उनकी शख़्सियत के कितने ही रंग संजोये हैं, उनके कृतित्व को समझने में मददगार तमाम पहलुओं पर विस्तार से और बेबाकी से बातचीत की है. नीरज से उनका लंबा साक्षात्कार हम यहां तीन कड़ियों में छाप रहे हैं. -सं [….]
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते और ओपन प्लेटफ़ार्म फ़ॉर नेताजी के संयोजक चंद्र कुमार बोस लंबे समय तक नौकरी करने के बाद कोलकाता में एक एचआर कंसल्टेंसी कंपनी चलाते हैं. कुछ दिनों राजनीति में भी सक्रिय रहे मगर जल्दी ही मोहभंग हो जाने पर अलग हो गए. इन दिनों देशव्यापी यात्रा करके नेताजी के आदर्शों की पुनर्प्रतिष्ठा और उनकी विचारधारा के प्रसार के काम में जुटे हुए हैं. [….]
के. के. (कृष्ण कुमार) मेनन का शुमार उन चुनिंदा अदाकारों में होता है जिनको बॉक्स ऑफिस की सफलता की ज़रूरत नहीं है. मसलन आज से साढ़े सोलह साल पहले जब फ़िज़ा में रेस (सैफ- कटरीना अभिनीत) और टशन (अक्षय, सैफ और करीना अभिनीत) फिल्मों के गीत छाए हुए थे, उस वक़्त रिलीज़ हुई फ़िल्म आलोचक समर ख़ान द्वारा निर्देशित शौर्य [….]