‘कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित’ शाह आलम की ऐसी किताब है, जिसमें उन्होंने देश की आज़ादी के लिए लड़ने वाले एक भूले-बिसरे क्रांतिकारी के कारनामे और संघर्षमय जीवन की झलकियां पेश की हैं. नई पीढ़ी जिसके नाम से भी बहुत वाक़िफ़ नहीं. [….]
उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. एक प्रगतिशील कवि होने के नाते वामिक़ साहब विचारधारात्मक प्रोपगंडे को साहित्य के लिए ज़रूरी मानते हैं पर उनकी शायरी में नारा अपनी कलात्मकता के साथ इस तरह दिखलाई पड़ता है कि वह काव्य सौन्दर्य का एक अंग बन जाता है. [….]