फीफा डायरी | यादों के रंग
फीफा विश्व कप 2026 का एक और दौर समाप्त हुआ. प्री-क्वार्टर फ़ाइनल के आठ मैच पूरे हुए. इस तरह कुल 104 मैचों में से 97 मैच इतिहास में दर्ज़ हुए. अपने टूटे सपनों को बटोरे 40 टीमें इस महासमर से विदा हुईं. शेष बचे सात मैचों में फ़ुटबॉल का नया इतिहास रचने के लिए आठ टीमें खम ठोंके मैदान में अभी भी जमी हैं.
बीते चार दिनों में 16 टीमों ने वो वायदा शिद्दत से निभाया जो पहले दो चरणों की जीत में इन टीमों ने अपने खेल के माध्यम से अपने समर्थकों और फ़ुटबॉल के चाहने वालों से किया था. इन चार दिनों और आठ मैचों में वो सब कुछ था जो जिसकी पूर्व पीठिका पहले दो चरणों के खेल ने लिखी थी.
यहां गोलों की रिमझिम बरसात थी. चूकों की गहरी शीत थी. एकस्ट्रा टाइम का खेल था. पेनाल्टी शूटआउट था. रेड कार्ड थे. वीएआर था. उससे उपजे विवाद थे. कुछ सितारों का विश्व कप के आसमान से अस्त हो जाना था. कुछ सितारों की चमक अभी भी आँखें चौंधियाती थी. नए सितारों का उदय भी हुआ चाहता था. कुछ टीमें थीं कि अपने खेल से प्रशंसकों के मन में ही घर कर लेना चाहती थीं. तो कुछ टीमें थीं कि फ़ुटबॉल चाहने वाले दिल से बाहर किए जाते थे. आगे बढ़ने की उमंग थी. विदाई की उदासी भी. कुछ की आंखों में सपनों के टूटने से बच जाने से उपजे आंसू थे. कुछ की आंखों में सपने किरच किरच हो जाने का पानी था. इन सबके बीच फ़ुटबॉल का खेल था और उसका रोमांच अपने उरूज पर था.
एक
इस दौर के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण और इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज़ हो जाने वाले दृश्य फ़ुटबॉल के सबसे बड़े सितारों की आंखों के पानी से बने थे. कुछ की आंख विछोह से भीगी थीं, कुछ की सपनों के टूट जाने से और कुछ की सपनों के टूटने टूटते बच जाने से. ये फ़ुटबॉल के इतिहास की सबसे गाढ़ी स्मृतियां हैं.
पहला दृश्य, मेस्सी की आंखों का नम होना. उनकी आंखों में ये आंसू खुशी से उपजे थे. एक अप्रत्याशित हार और विश्व कप को बचाने के सपने के टूटते टूटते रह जाने की खुशी से उपजे आंसू. अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश किया.मिस्र की टीम इस बार ग़ज़ब हौसले और मजबूती के साथ आई थी. उसने न्यूजीलैंड को हराकर विश्व कप की अपनी पहली जीत हासिल की. पहली बार नॉक आउट में प्रवेश किया. और उसके बाद चैंपियन अर्जेंटीना को हराकर इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा उलटफेर किया ही चाहती थी कि एक दूसरा इतिहास रचा गया.
अटलांटा स्टेडियम में खेले गए इस ऐतिहासिक मुक़ाबले में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना 78 वें मिनट तक 0-2 से पीछे चल रही थी. लेकिन मैच के आखिरी मिनटों में अविश्वसनीय वापसी करते हुए जीत दर्ज की. इस दौरान मेस्सी अपनी उम्र से संघर्ष करते हुए एक साधारण खिलाड़ी की तरह लगते रहे, जो गोलपोस्ट पर जगह बनाने और विपक्षी डिफेंडरों की भीड़ में गोल के अवसर बनाने की असफल कोशिश करता दिखा. लेकिन वे शानदार नेतृत्वकर्ता हैं. उन्होंने अंतिम समय तक हार नहीं मानी. अंततः 79 वें मिनट में एक शानदार पास रोमियों को दिया जिसने हेडर से गोलकर अर्जेंटीना के लिए मोमेंटम बना दिया. उसके बाद मेस्सी का बाएं पैर का सिगनेचर शॉट आया और 83 वें मिनट में बराबरी हुई. इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडीज ने हेडर से गोलकर जीत पक्की कर दी. आखिरी 15 मिनट में मेस्सी ने बताया कि वे क्यों गोट हैं.
आंखों में पानी सिर्फ मेस्सी के नहीं था. ये पानी नेमार की आंखों में भी था. नॉर्वे ने पांच बार की चैम्पियन ब्राजील को 2-1 से हराकर बड़ा उलटफेर किया. इसमें तीनों गोल दो बड़े सितारों ने किए. गोल मशीन एर्लिंग हालैंड ने 79 और 90वें मिनट में गोलकर नॉर्वे को अजेय बढ़त दिला दी. जबकि इंजरी टाइम में पेनाल्टी से नेमार ने गोलकर इस हार के अंतर को कम किया.
जहां हालैंड के इस विश्व कप में कुल सात गोल हुए और वे गोल्डन बूट की दौड़ में बने हुए हैं, वहीं नेमार का विश्व को जीतने का सपना टूट गया. मैच समाप्ति के बाद नेमार अपनी नम आंखों से अपनी खेल पारी की समाप्ति की घोषणा कर रहे थे. और पूरी दुनिया हतप्रभ दुखी मन से उनको विदाकर रही थी. हमारे दौर का एक और महान सितारा जो पेले की शानदार विरासत को आगे बढ़ा रहा था,मैदान से विदा हो रहा था.
एक और सितारा आंखों से मोती टपकाता विश्व कप को अलविदा कह रहा था. एक और महानतम खिलाड़ी विश्व कप को जीतने के अधूरे अरमान लिए फ़ुटबॉल प्रेमियों से विश्व कप में कभी ना दीखने के लिए विदा ले रहा था. ये पुर्तगाल का क्रिस्टियानो रोनाल्डो था. उसकी टीम एक बहुत प्रतीक्षित मैच में स्पेन की टीम से 0-1 से हारकर इस विश्व कप से बाहर हो गई थी. स्पेन और पुर्तगाल का ये मुक़ाबला बहुत बड़ा माना जा रहा था. लेकिन ये इस विश्व कप के सबसे नीरस मुकाबलों में से एक था जिसमें मैच के इंजरी टाइम में 91वें मिनट में मेरीनो ने गोलकर स्पेन पुर्तगाल को हरा दिया. ये मैच अब केवल और केवल रोनाल्डो की विदाई के लिए जाना जाएगा.
स्पेन से हार के बाद रोनाल्डो का विश्व कप न जीत पाने का ग़म उनकी आंखों से बह रहा था. उनके साथी उन्हें अकेला छोड़ टनल में जा चुके थे. और तब 18 साल के उनके प्रतिद्वंदी लामिने यमल ने उनको अपने गले से लगाया और उनके दुख को साझा किया. आप क्रिस्टियानो से प्यार कर सकते या घृणा कर सकते है. लेकिन उनकी महानता को उनसे कोई नहीं छीन सकता. विश्व कप ट्रॉफी उनकी जीती ट्रॉफी में एक और अंक की बढ़ोत्तरी भर होती बाकी उसका उनके पास ना होने से उनकी महानता पर क्या ही फर्क पड़ता है.
फ़ुटबॉल इन्हीं दृश्यों से ख़ूबसूरत बना हुआ है.
दो
ये दौर तीन मेजबान देशों की इस प्रतियोगिता से विदाई का दौर भी ठहरा.
इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच एक ऐसा रोमांचक मुक़ाबला हुआ जो अब तक के विश्व कप का सबसे बेहतरीन मैच था. क्या ही शानदार मैच था ये. अविश्वसनीय माहौल. नाटकीय गोल. एक पेनल्टी. एक रेड कार्ड. एक और पेनल्टी. आधे घंटे से अधिक समय तक आक्रामक दर आक्रमण और घबराई हुई रक्षा पंक्ति का खेल. अंतिम 46 मिनट में 10 बनाम 11 की टक्कर. परिणाम इंग्लैंड तीन गोल. मेक्सिको दो गोल.
कितना दुखद था कि एक टीम प्रतियोगिता से बाहर हो रही थी.
इंग्लैंड केवल एक मैच भर नहीं जीत रहीं थी बल्कि अपनी विश्व कप जीतने की राह की बहुत बड़ी बाधा पार कर रही थी. वो सिर्फ मेक्सिको की टीम से ही नहीं खेल रही थी, बल्कि स्टेडियम में मौजूद 80 हजार दर्शकों और उनके शोर के विरुद्ध भी खेल रही थी. वो सात हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित एस्टाडियो एज़्टेका पर वायु दाब, तापमान में बदलाव और ऑक्सीजन की कमी से भी लड़ रही थी. इन परिस्थितियों में भी ट्यूशेल की टीम ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो पहले किसी ने नहीं किया था. उन्होंने एस्टाडियो एज़्टेका में मैक्सिको के खिलाफ विश्व कप का मैच जीत लिया था.
और बेल्जियम ने तो कमाल ही कर दिखाया. उसने मेजबान यूएस की मजबूत मेजबान टीम को 4-1 से रौंद ही दिया था. ये कमाल हुआ कैसे. क्या इसका श्रेय डोनाल्ड ट्रम्प को जाना चाहिय. शायद हां या ना भी. उन्होंने फीफा से यूएस के सबसे सफल फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन को बोस्निया के विरुद्ध मैच में मिले रेड कार्ड के कारण एक मैच के प्रतिबंध को रद्द करवा दिया. इससे बेल्जियम की टीम पर गहरा प्रभाव पड़ा और पूरी टीम को एकजुट कर दिया. बेल्जियम जिसका कि प्रतियोगिता में अब तक प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा था,शानदार प्रदर्शन किया. अमेरिकी टीम पर 4-1 की जीत बेल्जियम के उच्च कोटि के खेल और उनके दबदबे की कहानी कहती है. मैच में जो कुछ हुआ वो मैदान के भीतर से ज्यादा मैदान के बाहर की घटनाओं का परिणाम था.
ये एक टीम से ज्यादा एक व्यक्ति की हार थी जिसकी प्रतिष्ठा एक बार फिर मुँह बाये ज़मीन पर औंधी पड़ी थी.
राउंट ऑफ 16 की शुरुआत ही एक सह मेजबान कनाडा की हार से हुई. अफ्रीका की एकमात्र आगे बढ़ी टीम मोरक्को ने आसानी से 3-0 से हराया. मोरक्को की टीम क्वार्टर फ़ाइनल में तो जरूर पहुंची पर इस मैच में उसे एक बड़ा झटका लगा. उनकी टीम आगे बढ़ गई, लेकिन उन्हें इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी. मैच के पहले हॉफ के हाइड्रेशन ब्रेक से ठीक पहले उन्हें हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई. 25 वर्षीय इस खिलाड़ी ने मोरक्को के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे थे और गोल कर रहे थे. एक हफ्ते पहले ही बायर्न म्यूनिख ने उन्हें अनुबंधित किया था. उनके स्टार खिलाड़ी इस्माइल सैबारी केवल इस मैच से ही नहीं बल्कि पूरी प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं.
तीन
एक और जहां इस दौर में शानदार और यादगार मैच हुए वहीं दो मैच बेहद नीरस रहे. स्पेन और पुर्तगाल का मैच नीरस रहा लेकिन वो रेगुलर टाइम में ही समाप्त हो गया. लेकिन स्विट्ज़रलैंड और कोलंबिया के बीच मुक़ाबला तो अतिरिक्त समय से निकल कर पेनाल्टी शूटआउट तक गया. ये मैच कैसा रहा इसको इस बात से समझा जा सकता है कि रेगुलर खेल के 90 मिनट में दोनों टीमों के कुल मिलाकर सिर्फ चार शॉट ही गोल पर लगे. जेम्स रोड्रिगेज और लुइस डियाज जैसे खिलाड़ियों के होने के बावजूद कोलंबिया की टीम स्विस डिफेंस को भेद नहीं पाई. स्विस टीम ने भी बीच-बीच में कुछ अच्छे प्रयास किए, लेकिन कोई खतरनाक हमला नहीं कर पाई. पेनाल्टी शूट आउट में स्विट्ज़रलैंड ने कोलंबिया को 4-3 से हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश किया.
चार
फ़िलाडेल्फ़िया की भीषण गर्मी में खेले गए मैच में चैंपियनशिप की सबसे प्रबल दावेदार फ्रांस की टीम ने पैराग्वे की टीम को 1-0 से हराया. फ्रांस का एक अनुशासित रक्षात्मक पैराग्वे टीम से सामना था जिसने फ्रांस को कड़ी टक्कर दी और उसे गोल करने या शॉट लेने की कोई जगह नहीं दी. ये पैराग्वे की वही मजबूत दीवार थी जिसने जूलियन नागेल्समैन की जर्मनी टीम और उनकी रणनीति को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था और राउंड ऑफ 32 में बड़ा उलटफेर कर सबको चौंका दिया था.
पैराग्वे के रक्षात्मक खेल के अलावा आक्रामक और फिजिकल खेल के कारण सितारों से सजी फ्रांसीसी टीम मैच के अधिकांश समय तक पैराग्वे के गोल पर कोई गंभीर खतरा उत्पन्न नहीं कर पाई. लेकिन 70वें मिनट में म्बाप्पे पेनल्टी क्षेत्र में घुसे और गिर पड़े. पहले उनके विरुद्ध कोई फाउल नहीं दिया गया लेकिन वीएआर के जरिए उस फैसले की समीक्षा की गई और उसे पलट दिया गया. फ्रांस को पेनल्टी किक दी गई. म्बाप्पे ने पेनल्टी को गोल में बदल दिया. ये इस मैच का एकमात्र गोल था. इस मैच में भी पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार बचाव किए.
इस मैच में पैराग्वे की टीम ने बेहद आक्रामक और शारीरिक खेल दिखाया. फ्रांस के खिलाड़ियों को चोटिल करने और रोकने के लिए उन्होंने हर हथकंडा अपनाया जिसे ‘डर्टी’ खेल बताया गए और इसे लेकर मैच के बाद काफी विवाद भी हुआ.
पांच
क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंची आठ टीमों में से छह टीमें यूरोप की हैं. इसके अलावा एक टीम दक्षिण अमेरिका से अर्जेंटीना और अफ्रीका से मोरक्को है. ये समीकरण फ़ुटबॉल में अभी भी यूरोपीय प्रभुत्व की कहानी कहता है.
छह

और चलते-चलते बात टिकटों की कीमतों की. विश्व कप के शुरू होने से पहले टिकटों की बहुत ज्यादा क़ीमत और उनकी काला बाजारी की बहुत चर्चा थी. लेकिन मेजबान अमेरिका की हार और पुर्तगाल के बाहर हो जाने के तुरंत बाद ही सेकेंडरी मार्केट में 60 फ़ीसद से भी कम हो गई हैं. अब क्वार्टर फ़ाइनल के लिए टिकट की क़ीमत 2950 डॉलर प्रति टिकट से घटकर 1200 डॉलर प्रति टिकट हो गई है. सबसे सस्ती टिकट फ्रांस और मोरक्को क्वार्टर फ़ाइनल मैच की है, जिसकी क़ीमत लोकप्रिय और भरोसेमंद सेकेंडरी टिकट मार्केटप्लेस टिक पिक में 989 डॉलर से शुरू है.
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