फीफा | सेबारी के शूटआउट ने रचा इतिहास
फीफा विश्व कप फ़ुटबॉल 2026 के नॉक आउट चरण के पहले दिन ही सोमवार को जो कुछ हुआ, उसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं था. इसकी प्रस्तावना पिछले 18 दिनों से लिखी जा रही थी. कुराकाओ और केप वर्डे जैसी टीमों ने अपने खेल और अपने तेवर से ये स्पष्ट कर दिया था कि बड़ी से बड़ी टीम अपनी जीत को ग्रांटेड नहीं ले सकती. यहां हर जीत को अर्जित करना पड़ता है मेहनत, संघर्ष और हुनर से. ये पहले ही तय हो गया था कि अगला दौर किस इंटेंसिटी से खेला जाने वाला है. इंटेंसिटी इसलिए भी कि यहां से किसी भी टीम के लिए वापसी करने का कोई रास्ता नहीं है. अब सिर्फ़ और सिर्फ़ करो या मरो. न कम न ज्यादा. केवल दो परिणाम हार या जीत. दो रास्ते आगे बढ़ो या घर वापस हो लो.
नॉक आउट दौर के पहले दिन चार मुक़ाबले हुए. चार में से दो मैचों का निर्णय 120 मिनट के खेल के बाद पेनाल्टी शूट आउट से हुआ. बाक़ी दो मैचों का निर्णय भी 90 मिनट के बाद इंजरी टाइम में खेल समापन की आखिरी व्हिस्ल बजने से बस पहले. दो उलट-फेर हुए और एक होते होते बचा तो मेज़बान टीम के आगे बढ़ने का क्रम जारी रहा.
एक
पहले बात नीदरलैंड और मोरक्को के बीच हुए मैच की. मैच शुरू से संघर्षपूर्ण था. मैच का पहला गोल 71 वें मिनट में नीदरलैंड के स्टार खिलाड़ी कोडी गेपको ने किया. 90 मिनट तक यह बढ़त बरकरार रही. जब लगा कि रोनाल्ड कोमेन की टीम अगले दौर में जा रही है तो इंजरी टाइम में 91वें मिनट मोरक्को के ईसा डिओप के गोलकर स्कोर बराबर कर दिया. मैच एकस्ट्रा टाइम में गया पर स्कोर 1-1 ही रहा.
अब निर्णय पेनाल्टी शूट आउट से होना था. पेनाल्टी शूट आउट में भी चार चार पेनाल्टी के बाद स्कोर 2-2 पर बराबर था. नीदरलैंड की तरफ़ से पांचवीं पेनाल्टी क्रिसेंसियो समरविले ने ली और बॉल बाहर मार दी. अब हार जीत का सार दारोमदार एक खिलाड़ी पर था जो मोरक्को की पांचवीं पेनाल्टी ले रहा था. उसका नाम था इस्माइल सैबारी. उसने अपना संतुलन बनाए रखा. उसने शॉट लिया और बॉल नीदरलैंड के गोलकीपर की डाइव की विपरीत दिशा में गोल के बाएं और जाल में उलझा दी.
मोरक्को पेनाल्टी शूटआउट 3-2 से जीत चुका था. उसने एक इतिहास रच दिया था. इस बार डच टीम को हरा कर. उसने बताया कि पिछले विश्व कप में सेमीफ़ाइनल तक का उनका सफ़र कोई संयोग नहीं था. इस जीत के नायक इस्माइल थे इस्माइल सेबारी. वो इस्माइल सेबारी जो डच लीग के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं. जो डच फ़ुटबॉल क्लब इंडोहोवेन से खेलते हैं. वो इस्माइल सेबारी जो बचपन में अस्थि संबंधी विकार के कारण ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते थे. जिन्हें बचपन में चलने और खड़े होने के लिए ‘ऑर्थोटिक ब्रेस’ का प्रयोग करना पड़ता था. वो इस्माइल सेबारी जिसने तब भी हार नहीं मानी और फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया. और जब बेल्जियम की एंडरलेक्ट टीम के लिए ट्रायल दिया तो मोटापे की वजह से सिलेक्शन ना हो सका. उन्होंने तब भी हार नहीं मानी और खेलना जारी रखा. वही इस्माइल सेबारी आज राष्ट्र की उम्मीद है, टीम का नायक हैं, विश्व कप के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शुमार हैं, फ़ुटबॉल प्रेमियों का हीरो है.
दूसरी ओर नीदरलैंड्स के लिए वर्ल्ड कप का मैच अतिरिक्त समय में या पेनल्टी शूटआउट में हारना दुर्भाग्य या किसी शाप की बात है. यह अविश्वसनीय-सा ही लगता है कि नीदरलैंड ने 2010 के बाद से विश्व कप का कोई भी मैच निर्धारित समय सीमा में नहीं हारा है. आज के मैच से पहले उसके नाम 10 जीत और पांच ड्रॉ दर्ज हैं. और वो जब भी हारी, एक्स्ट्रा टाइम में ही हारी फिर चाहे वो 2014 के सेमीफ़ाइनल और 2022 के क्वार्टरफ़ाइनल में अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हार हो या फिर आज मोरक्को से हार हो.
दो
एशिया ओशियाना क्षेत्र से दो टीमें नॉक आउट में पहुंची थीं – जापान और ऑस्ट्रेलिया. कल जापान का सफ़र ख़त्म हुआ और एशिया की आधी उम्मीद भी. आधी इसलिए कि अभी ऑस्ट्रेलिया बाक़ी है. ब्राजील और जापान के बीच एक बेहद रोमांचक और कड़ा मुक़ाबला हुआ. जापान हारे ज़रूर लेकिन कड़े संघर्ष के बाद. एक सम्मानजनक हार. कि हारे ज़रूर पर दिल जीत लिया.
पहला गोल जापान ने 29वें मिनट में किया. जापानी मिडफ़ील्डर काइशु सानो ने मध्य मैदान से एक पास बहुत ही शानदार तरीक़े से इंटरसेप्ट किया और शानदार गोल दाग कर जापान को एक गोल से बढ़त दिला दी. हाफ़ टाइम तक यही स्कोर रहा. दूसरे हाफ़ में ब्राजील की टीम बदली दिखाई दी. उसने जापानी गोल पर आक्रमणों की झाड़ी लगा दी. जल्द ही इसका लाभ मिला और कशमीरो ने शानदार गोलकर स्कोर बराबर कर दिया. उसके बाद 90 मिनट तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी. जब ये लगने लगा कि मैच एक्स्ट्रा टाइम में जाएगा तो इंजरी टाइम में 95वें मिनट में मार्टीनेली ने गोलकर ब्राजील को 2-1 से जीत दिला दी.
ये निश्चित है मैच अतिरिक्त समय में जाता या फिर पेनाल्टी से निर्णय होता, तो कुछ भी हो सकता था. ब्राज़ील ने बहुत करीबी जीत हासिल की और एक अपसेट वाले दिन में खुद को बड़े अपसेट से बचा लिया.
तीन
दिन का सबसे बड़ा उलट-फेर पैराग्वे ने किया. उसने जर्मनी की टीम को पेनाल्टी शूट में 4-3 से हराकर पहली बार प्री क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई. ये पैराग्वे के फ़ुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर था.
समय-समय की बात है. कोई एक समय होता था जब जर्मनी से प्रतियोगिता को जीत लेने की उम्मीद की जाती थी. वो आठ बार विश्व कप के फ़ाइनल में पहुंच चुका है और चार बार जीत चुका है. वो यूरोपीय चैंपियनशिप के भी छह फ़ाइनल खेल चुका हैं जिसमें से तीन उसने जीते हैं. प्रतियोगिता के शुरू होने के समय पैराग्वे की विश्व रैंकिंग 41वीं थी और जर्मनी 10 वें पायदान पर था. लेकिन पहले चरण ने एक बात स्पष्ट कर दी थी कि बड़ी टीम होना,फेवरिट होना या जीत का समृद्ध इतिहास होना जीत की गारंटी नहीं है.
गेंद पर 75 प्रतिशत नियंत्रण के बावजूद पहला गोल 42वें मिनट में पैराग्वे के स्ट्राइकर जूलियो एनसिसो ने किया. जबकि सुव्यवस्थित आक्रमण के बावजूद जर्मनी की टीम गोल नहीं कर पाई. जर्मनी की तरफ़ से बराबरी का गोल काई होवर्ट्ज ने 54 वें मिनट में हेडर से किया. मैच के अतिरिक्त समय में भी गोल ना होने के कारण पेनाल्टी शूट से निर्णय हुआ. यहां भी इतिहास जर्मनी के साथ था. जर्मनी ने विश्व कप के अब तक हुए अपने चारों पेनाल्टी शूट जीते थे. लेकिन यहां पैराग्वे ने पैनल्टी शूट में 4-3 से हारकर विश्व कप का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया.
चार
तीनों सह मेजबान देशों के लिए प्रतियोगिता अभी तक बेहतरीन रही है. मेक्सिको,यूएस और कनाडा तीनों ही देशों ने नॉक आउट के लिए क्वालीफाई कर लिया है. और अब नॉक आउट के पहले मैच में मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफीका को हराकर प्रीक्वार्टर फ़ाइनल प्रवेश कर लिया है,जहाँ उसका मुक़ाबला मोरक्को से होगा.
ये भी एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मैच था. लेकिन कोई भी टीम पूरे समय में गोल करने में सफल नहीं हो सकी. जब ये लगने लगा कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा,तब इंजरी टाइम में 92 वें मिनट में कनाडा के कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने गोल कर टीम को जीत दिला दी.
तो अब प्री क्वार्टर फ़ाइनल की चार टीमें निश्चित हो चुकी हैं—कनाडा, पैराग्वे, मोरक्को और ब्राजील. इसके साथ ही एक मैच भी निश्चित हो चुका है—कनाडा और मोरक्को का. पहले दिन के मैचों के परिणाम ये उद्घोष कर रहे हैं, ‘पिक्चर अभी बाक़ी है मेरे दोस्त’.
कवर | इंस्टाग्राम के सौजन्य से
सम्बंधित
फीफा के रंग | गुलाबी भी मुक़ाबले में
फीफा के सितारे | यान डियोमोंड़े
अपनी राय हमें इस लिंक या feedback@samvadnews.in पर भेज सकते हैं.
न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें.
दुनिया जहान
-
बेसबब नहीं अपनी जड़ों की तलाश की बेचैनीः राजमोहन
-
और उन मैदानों का क्या जहां मेस्सी खेले ही नहीं
-
'डि स्टेफानो: ख़िताबों की किताब मगर वर्ल्ड कप से दूरी का अभिशाप
-
तो फ़ैज़ की नज़्म को नाफ़रमानी की दलील माना जाए
-
करतबी घुड़सवार जो आधुनिक सर्कस का जनक बना
-
अहमद फ़राज़ः मुंह से आग लगाए घूमने वाला शायर
-
फॉर्म या कंटेंट के मुक़ाबले विचार हमेशा अहम्
-
सादिओ मानेः खेल का ख़ूबसूरत चेहरा