प्रतापगढ़ में बाबूपट्टी के बच्चन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी पढ़ाते मगर कविताएं हिंदी में करते. उनके दो दर्जन से ज़्यादा कविता संग्रह छपे मगर ज़माना उन्हें याद करता है, ‘मधुशाला’ के लिए. निःसंदेह वह हालावाद के प्रवर्तक रहे भी. [….]
उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. एक प्रगतिशील कवि होने के नाते वामिक़ साहब विचारधारात्मक प्रोपगंडे को साहित्य के लिए ज़रूरी मानते हैं पर उनकी शायरी में नारा अपनी कलात्मकता के साथ इस तरह दिखलाई पड़ता है कि वह काव्य सौन्दर्य का एक अंग बन जाता है. [….]
कला | जे. स्वामीनाथन
“विचारधारा और कला का सम्बन्ध कभी नहीं होता, जैसा कुछ मार्क्सवादी लोग मानते हैं. लेनिन का पोर्ट्रेट बना देने से कला प्रगतिवादी नहीं हो जाती. देखा जाए तो एज़रा पाउंड की सहानुभूति फ़ासिस्ट के साथ थी, लेकिन उसे कोई कैसे कहेगा कि वह एक महान कलाकार नहीं था. स्वयं तालस्तोय कहाँ के प्रगतिवादी थे! [….]