भीत-सी आँखोंवाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेश-पत्र लौटाते हुए कहा – ‘आपने आयु ठीक नहीं भरी है. ठीक कर दीजिए, नहीं तो पीछे कठिनाई पड़ेगी.’ [….]
मुज्तबा हुसैन से वाक़िफ़ लोग उनकी नज़र और क़लम के जादू के मुरीद रहे हैं. हिन्दी और उर्दू दोनों ही ज़बान के पढ़ने वालों ने उन्हें मुहब्बतों से नवाज़ा. भारतीय उप-महाद्वीप में तंज़ो-मिज़ाह के फ़न के वह आख़िरी मुगल थे. [….]
यूं ऐसा कोई लक्षण नहीं था. इतनी देर से इतने विषयों पर इतनी ऊर्जा और उत्साह के साथ बिज्जी को बोलते देख मैंने पूछ लिया था, ‘आप थक तो नहीं रहे हैं?’ तपाक से कहा गया – ‘नहीं, थकान बिल्कुल नहीं. सत्रह-अट्ठारह घंटे काम के बाद बढ़िया नींद आती है मुझे… और फिर एकदम फ्रेश.’ [….]
एकदम अवसन्न-से… बेहद भावुक हो उठे हैं बिज्जी – मगर उस दिन तो आकाश ही उलट पड़ा था. सपना बिखरने में कुछ भी देर नहीं लगी. तब मेरी उम्र रही होगी पच्चीस या छब्बीस बरस… वहां से थोड़ी दूर सोजती गेट पड़ता है – अब वहां जयनारायण जी व्यास की मूर्ति प्रतिष्ठित है – बहुत उदास-उदास, घूम रहा था [….]
फ़िल्मी गीतों की मार्फ़त ही शैलेंद्र को पहचानने वाले मुमकिन कि यह न जानते हों कि बरसों से सड़कों पर जो नारे वे सुनते आए हैं, दीवारों पर पढ़ते आए हैं, उनमें से कितने ही शैलेंद्र की देन हैं – ‘हर जोर-जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है..’ [….]
(विजयदान देथा ने राजस्थानी में लिखा मगर हिन्दी में उनकी लोकप्रियता कम नहीं. वह इतने गजब के क़िस्सागो रहे कि उनकी कहानियां पढ़ना शुरू करने के बाद ख़त्म करना ज़रूरी हो जाता है. [….]
कुछ कहानियां ऐसी हैं, जिनके बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए दोस्तों से अक्सर कहता हूं, ‘तुम एक साथ दो कहानियां नहीं पढ़ सकते.’ दरअसल यह उन कहानियों की ताक़त और उनके असर के बयान का यह मेरा तरीक़ा है. मंटो और गुलज़ार को भी पढ़ते हुए मैं हमेशा ऐसा ही महसूस करता हूं. [….]
अंत में मैं अपनी संगीत यात्रा में अपने सहयात्री देश के सुप्रसिद्ध एवं लोकप्रिय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का उल्लेख करना चाहता हूं. पंडित जसराज उन नितांत अद्वितीय विरल गायकों में से हैं जिन्होंने शास्त्रीयता के साथ जनचित्त को रंजन करने वाली गायकी को न केवल प्रतिष्ठा दिलाई [….]
क्रिकेट खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री चेतन चौहान का कल गुड़गांव के एक अस्पताल में निधन हो गया. वे 73 वर्ष के थे और कोरोना से संक्रमित थे. धोनी और रैना की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास की घोषणा से एक दिन पहले ही क्रिकेट जगत में जो हलचल मची थी [….]
महेंद्र सिंह धोनी के अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट के शुरूआती दिन थे. टीम में उनकी जगह स्थायी नहीं हुई थी. अपने पहले मैच की पहली गेंद पर बिना रन बनाये ही वह आउट हो चुके थे. भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए जूझ रहे थे. दिनेश कार्तिक उनकी जगह लेने के लिए मुँह बाये खड़े थे. [….]