राजेंद्र यादव अपनी ख़ामियों-ख़ूबियों से ख़ूब वाक़िफ़ थे और इसे लेकर काफी सचेत भी. उनकी यह ख़ूबी आयुपर्यंत बनी रही कि जहां वे होते, वहां तो उनकी उपस्थिति उनके तेवर और उनकी बेबाक़ी से महसूस की ही जाती मगर ग़ायब रहकर भी चर्चा के केंद्र में बने रहने का हुनर उन्हें ख़ूब हासिल था. [….]