नई दिल्ली | गांधी मजबूरी का नहीं, बल्कि मजबूती का पर्याय हैं. वे मजबूरी केवल उन्हीं लोगों के लिए हो सकते हैं जिन्हें सत्य से भय है या जिनके पास उनकी नैतिक और वैचारिक मजबूती की कोई काट नहीं है. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शुक्रवार को प्रख्यात विचारक और लेखक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘मज़बूती का नाम महात्मा गांधी : अहिंसा, सत्य और धर्म’ [….]
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