ख़ालिद जावेद का नया उपन्यास ‘इक्कीस एक सौ बाईस’ उर्दू फ़िक्शन में एक ऐसे तजुर्बे की हैसियत रखता है, जिसे सिर्फ़ एक कहानी या पारंपरिक उपन्यास के पैमानों से समझना मुमकिन नहीं. यह उपन्यास अपने बयानिया, भाषा, माहौल, मनोवैज्ञानिक गहराई, [….]
ऋत्विक घटक पर केन्द्रित किताब ‘ऋत्विक घटकः नव यथार्थवादी सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ भारतीय सिनेमा और सिने-विमर्श के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आई है. यह किताब केवल एक महान फ़िल्मकार के जीवन और कृतित्व का विवरण भर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सिने-चिन्तक, सांस्कृतिक हस्ताक्षर और वैचारिक कलाकार [….]
“उनकी दुनिया में दाख़िल होने का हुनर मैंने साध लिया था, यह कुछ-कुछ वैसा ही था जैसे कि मकड़ी के जाले का व्यूह भेदने वाला कोई चालाक कीड़ा करता है—ख़ुद को जाल में फंसने से बचाने के लिए अपने पंखों को समेटकर, कम से कम जगह घेरते हुए—मैं अंदर दाख़िल होती और उसी रास्ते से लौटते हुए पूरी एहतियात बरतती कि कहीं जाले के धागों में [….]