एक दरवाज़ा, जो एक कहानी की ओर खुलता है
मेरे घर का दरवाज़ा जब खुलता है, तो सामने कोई आम मंज़र नहीं होता—होता है एक ख़ामोश क़िस्सा, जो हर सुबह मेरी तरफ़ एकटक देखता है. [….]
कुछ दिन पहले एक नेकदिल मौसी ने, अपनी पुरानी मुस्कुराहट के साथ, रजनी को एक अजीब-ओ-ग़रीब तोहफ़ा भेजा—वो थे शंख, शंकु या कोन या यूं कहिए तीन समुद्री सीपियाँ. ये कोई छोटी सीपियाँ नहीं थीं ख़ासे बड़े शंख थे. उनमें से एक ने तो आते ही दिल चुरा लिया—जैसे भीड़ भरे बाज़ार में कोई अजनबी चेहरा अचानक अपना-सा लगने लगे. [….]
प्रयागराज | वीथिका की ओर से हुए साहित्यिक आयोजन ‘पीढ़ियां’ में देश के विख्यात साहित्यकार और आलोचक शामिल हुए. साहित्यकारों की तीन पीढ़ियों पर केंद्रित वीथिका का यह कार्यक्रम इतवार को इलाहाबाद संग्रहालय में हुआ. इस विशिष्ट आयोजन में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, लेखन प्रक्रिया के बारे में बात [….]
बचपन का भी वो बहुत पहला और कच्चा-सा हिस्सा था, जब न ‘सराय’ का मतलब पता था, और न ही यह मालूम था कि ‘रोहिल्ला’ होता क्या है. उस वक़्त की यादें भी कैसे बची हैं, ये सोच कर भी मैं हैरान हूँ. दिल्ली के सराय रोहिल्ला स्टेशन से हमारा घर कुल चार सौ मीटर पर था. घर के पास से बहुत-सी रेल लाइन गुज़रती थीं जिन पर से रेलगाड़ी [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन के 81वें स्थापना दिवस पर शनिवार शाम को आयोजित ‘सहयात्रा उत्सव’ में समकालीन साहित्य और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार-विमर्श हुआ. इस अवसर पर ‘भविष्य के स्वर’ विचार-पर्व के छठे संस्करण में पाँच युवा वक्ताओं—कलाकार उन्नति चौधरी, शोधार्थी-अध्येता पंकज कुमार, कवि पराग [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन अपनी स्थापना के 81वें वर्ष में प्रवेश के मौक़े पर 28 फरवरी की शाम ‘सहयात्रा उत्सव’ का आयोजन कर रहा है. इस मौक़े पर ‘भविष्य के स्वर’ विचार-पर्व का छठा संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें पाँच युवा प्रतिभाएँ अपने व्याख्यान देंगी. विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले [….]