फीफा डायरी | सेमीफ़ाइनल दो
अक्सर खेल केवल खेल के मैदान में ही नहीं खेले जाते बल्कि एक समानांतर खेल खिलाड़ियों के सीने में भी चल रहा होता है. कई बार फ़ुटबॉल जितनी पैरों से खेली जाती उतनी ही मनोभावों और उद्वेगों से भी खेली जाती है. ऐसे मैचों में खिलाड़ियों की स्किल के ऊपर उसका पैशन हावी हो जाता है. इंटेंसिटी हद से ज्यादा बढ़ जाती है. और खेल है कि फ़िजिकल होने लगता है. और अगर मैदान में इंग्लैंड और अर्जेंटीना जैसे प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हों तो फिर क्या ही बात है. इस बात की ताईद कल अटलांटा में खेला गया फीफा विश्व कप का दूसरा सेमीफ़ाइनल करता है.
जैसे-जैसे अर्जेंटीना और इंग्लैंड की टीमें आगे बढ़ रही थीं, दोनों टीमों के मुक़ाबले की संभावनाएं बढ़ती जा रही थीं. और भावनाओं की तीव्रता भी. अर्जेंटीना के समर्थक जहाँ भी जाते वे अपना नया विश्व कप एंथम ‘ला कुआर्ता एस्ट्रेला’ द फोर्थ स्टार गाते. इस गाने में माराडोना और मेस्सी के साथ साथ माल्वीनास यानी फ़ॉकलैंड द्वीप समूह का भी जिक्र है. माल्वीनास की ग्रंथि समर्थकों के मन में ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों में भीतर भी किसी कोने में बैठी थी. मिस्र पर जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अपने ड्रेसिंग रूम में ये गाना गया. और उसके बाद जिस तरह से ये मैच शुरू होने से पहले अपने राष्ट्र गान जिस जोश और जूनून और हाव भाव से गाया,उससे ये लग गया था कि टीम के लिए ये सेमीफ़ाइनल से कुछ ज्यादा है.
स्कोलिनी ने अपना 4-4-2 के फॉर्मेशन से टीम उतारी. लेकिन टीम में एक बदलाव किया. मैदान के भीतर मेस्सी के बॉडी गार्ड कहे जाने वाले मिडफील्डर की जगह रोड्रिगो डी पॉल की जगह गुलियानी सिमोने को खिलाया. दूसरी और इग्लैंड ने अपनी टीम में तीन बदलाव किए. फुल बच रीस जेम्स और जेड स्पेंस तथा विंगर मॉर्गन रोजर्स को टीम में शामिल किया.
कोच थॉमस ट्यूशेल ने 4-2-3-1 फॉर्मेशन के साथ शुरुआत की. इंग्लैंड की रणनीति मिडफील्ड को कंट्रोल करने और मेसी को रोकने की थी.
पहले हाफ के खेल की इंटेंसिटी बताती है कि भावनाओं ने प्राथमिकता ग्रहण कर ली हैं. इस हाफ़ में एक भी गोल नहीं हुआ. कोई शॉट दोनों टीमों का टारगेट पर नहीं लगा. और 19 फाउल हुए. ये हाफ़ भावनाओं के अतिरेक में खेला गया. खेल फ़िजिकल हुआ और दोनों में से कोई भी टीम लय नहीं पा सकी. कुछ हद तक ये हाफ़ नीरस रहा.
लेकिन पहले हाफ़ के बाद मध्यांतर में खिलाड़ियों के दिमाग से भावनाओं का ज्वार उतरा तो उन्हें फ़ुटबॉल की याद आई तो फ़ुटबॉल ने लय,गति और ताल सब कुछ पा लिया. खेल रोमांचक और संघर्षपूर्ण हो गया.
डेडलॉक इंग्लैंड ने 55 वें मिनट में तोड़ा जब मॉर्गन रोजर्स ने दाहिनी ओर से शानदार क्रॉस डाला जिसे एंथनी गॉर्डन ने पकड़ा और कुटी रोमेरो को चकमा देते हुए सटीक गोल दाग दिया. यहां पर खेल इंग्लैंड के नियंत्रण में था. और अर्जेंटीना बैकफुट पर थी.
बस यहीं पर इंग्लिश कोच टुशेल और टीम चूक गई. यहां से टीम एकदम रक्षात्मक हो गई. वे एक और गोल के लिए गए ही नहीं. उस समय तक 35 मिनट और इंजरी टाइम का खेल बाकी था. इतने लंबे समय तक एक गोल की लीड को बचाना किसी भी रक्षा पंक्ति के लिए बहुत दुष्कर कार्य होता है. वोभी अर्जेंटीना जैसी टीम और मेस्सी के खिलाफ.
72वें मिनट में बदल गया थॉमस ट्यूशेल ने गोल करने वाले एंथोनी गॉर्डन की जगह डिफेंडर एजरी कोंसा को मैदान में उतारकर लो ब्लॉक बनाकर अर्जेंटीना को रोकने का प्रयास किया. उसके बाद दस मिनट बाद थॉमस ट्यूशेल एक और रक्षात्मक बदलाव किया और मिडफील्डर डेक्लान राइस की जगह डिफेंडर निको ओ’रेली को मैदान में उतारा. साथ ही रीस जेम्स की जगह डैन बर्न को मैदान में उतारा.
इसके विपरीत स्कोलिनी ने आक्रामक रुख़ अपनाया. उन्होंने पहले निकोलस गोंजालेज को और फिर 81वें मिनट में लेफ्ट-बैक निकोलस टैग्लियाफिको की जगह स्ट्राइकर लोटारो मार्टिनेज को मैदान में उतारा. इससे खेल पर पूरी तरह से नियंत्रण अर्जेंटीना का हो गया. गॉर्डन के 55वें मिनट में किए गए पहले गोल और लोटारो मार्टिनेज के 90+2वें मिनट में किए गए विजयी गोल के बीच, इंग्लैंड के पास केवल 12 प्रतिशत गेंद का कब्ज़ा रहा क्योंकि अर्जेंटीना ने इस बीच हमलों की झड़ी लगा दी. इसका परिणाम अर्जेंटीना को 85वें मिनट में मिला जब मेस्सी के पास पर बॉक्स से बाहर एंज़ो फर्नांडीज शानदार लांग रेंज शॉट लगाकर मैच बराबरी पर ला दिया. सात मिनट बाद ही इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेस्सी ने दाहिनी ओर से जेड स्पेंस को पछाड़ते हुए एक जादुई क्रॉस दिया जिसपर लोटारो मार्टिनेज ने हेडर से गोल कर दिया और टीम को फ़ाइनल में पहुंचा दिया.
ये अर्जेंटीना का लगातार चौथा नॉकआउट मैच था जिसमे बिल्कुल अंत समय में जादूबसा खेल दिखाकर विपक्षी टीम को न केवल हतप्रभ किया बल्कि पूरी तरह पछाड़ दिया. वे किसी सोये शेर की तरह उठते और कुछ ही समय में विपक्ष के पूरे खेल को तहस-नहस कर देते. राउंड ऑफ 32 में कोबे वर्डे के खिलाफ 110वें मिनट तक 2-2 की बराबरी पर थे. राउंड ऑफ 16 में 78 वें मिनट मिस्र से 0-2 से पीछे थे. क्वार्टर फ़ाइनल में स्विट्ज़रलैंड से 111 वें मिनट तक 1-1 की बराबरी पर थे और सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड से 85 वें मिनट तक 0-1 से पीछे थे.
अर्जेंटीना की टीम ने बताया आख़िरी समय तक हार नहीं माननी चाहिए और प्रयास करते रहना चाहिए. सफलता मिलती ही है. कोई हार जब तक अंतिम नहीं होती, जब तक समाप्ति की सीटी न बज जाए.
नॉकआउट मैचों में अर्जेंटीना की टीम एक रूपक गढ़ती है, उस बुझते दिए का जो बुझने से पहले जोरदार तरीके से फड़कता है. मैदान रूपी दिए में जब तेल ख़त्म होने को ही होता है तो बाती रूपी अर्जेंटीना की टीम अचानक से अपनी सारी ऊर्जा और क़ाबिलियत से फड़फड़ा उठती है और विपक्ष को ध्वस्त करके उत्पन्न प्रकाश रूपी आनंद से अपने प्रशंसकों के दिलों को दीप्त कर देती है.
और अर्जेंटीना के समर्थक ख़ुशी से झूमकर कह उठते हैं -वामोस मेस्सी. वामोस अर्जेंतीना.
कवर | इंस्टाग्राम से साभार
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