डॉ. मुल्कराज आनंद अंग्रेज़ी के उन महत्वपूर्ण भारतीय लेखकों में हैं, जिन्होंने ब्रिटिश राज में भारतीय समाज के यथार्थ और विद्रूप को हुक्मरानों की ज़बान में लिखा और ख़ूब लिखा. अपनी 99 साल की ज़िंदगी में उन्होंने सौ से ज़्यादा किताबें लिखीं. [….]
उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. एक प्रगतिशील कवि होने के नाते वामिक़ साहब विचारधारात्मक प्रोपगंडे को साहित्य के लिए ज़रूरी मानते हैं पर उनकी शायरी में नारा अपनी कलात्मकता के साथ इस तरह दिखलाई पड़ता है कि वह काव्य सौन्दर्य का एक अंग बन जाता है. [….]