दोस्त और शागिर्द उन्हें आदर और प्यार से उन्हें बेनू दा पुकारते. और उन सबकी प्रेरणा के स्रोत बेनू सेन की हमेशा कोशिश रहती कि अपना सारा हुनर, सारा कौशल फ़ोटोग्राफ़ी के जिज्ञासुओं से साझा कर सकें. उनके स्टूडेंस ने भी उनसे ख़ूब सीखा और अमल किया. [….]
पचास साल किसी इंसान के जीवन में बहुत बड़ा काल खंड होता है. एक नवजात अधेड़ अवस्था में पहुंच जाता है और एक युवा वृद्ध हो जाता है. तमाम गांव शहरों में तब्दील हो जाते हैं और कुछ शहर महानगरों में. दुनिया के मुल्कों में कई-कई निज़ाम बदल जाते हैं. कोई एक देश तमाम आज़ाद पहचानों में बदल जाता है तो बंटे हुए दो देश वापस एक पहचान में तब्दील हो जाते हैं. [….]
आकाशवाणी के कार्यक्रमों से लेकर फ़िल्मों के संस्कृतनिष्ठ गीतों तक जिस एक शख़्स की छाप हमेशा बराबर मिलती है, वह पंडित नरेंद्र शर्मा हैं. बहुआयामी व्यक्तित्व वाले नरेंद्र शर्मा हिंदी की आन-बान और शान थे. कवि-गीतकार, लेखक, अनुवादक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रशासक – जीवन में जो भी भूमिका मिली उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. [….]
उनकी शायरी की सोहबत का एक फ़ैज़ तो यही है कि ‘उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है..’. फ़ैज़ सच्चे वतनपरस्त थे और दुनिया भर के जनसंघर्षों के साथ खड़े होने के हामी भी. साम्राज्यवादी ताकतों ने जब भी दीगर मुल्कों को साम्राज्यवादी नीतियों का निशाना बनाया, फ़ैज़ ने उन मुल्कों की हिमायत में अपनी आवाज़ उठाई. [….]