हर उड़ान की एक मंज़िल होती है. कि एक चमकीला दिन शाम में घुल जाता है. कि पूनम का चाँद सूरज की अगवानी में स्वाहा होता जाता है. कि रात के जगमग सितारे सुबह के आगे नतमस्तक हो जाते हैं. कि जैसे अभी जो बसंत है उसे ग्रीष्म में पिघल जाना है. कि प्रसिद्धि के आकाश में अनंत ऊंचाइयों वाली एक उड़ान अंततः पूर्ण विराम की अवस्था में [….]
संस्कृति