कुछ दिन पहले एक नेकदिल मौसी ने, अपनी पुरानी मुस्कुराहट के साथ, रजनी को एक अजीब-ओ-ग़रीब तोहफ़ा भेजा—वो थे शंख, शंकु या कोन या यूं कहिए तीन समुद्री सीपियाँ. ये कोई छोटी सीपियाँ नहीं थीं ख़ासे बड़े शंख थे. उनमें से एक ने तो आते ही दिल चुरा लिया—जैसे भीड़ भरे बाज़ार में कोई अजनबी चेहरा अचानक अपना-सा लगने लगे. [….]
संस्कृति