जौनपुर | आज हिंदी भवन के अजय कुमार सभागार में स्मृति सभा ‘याद-ए-अजय कुमार’ का आयोजन जन संस्कृति मंच द्वारा किया गया. इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के कई शहरों से उनके चाहने वाले [….]
प्रयागराज | मूर्धन्य रंगकर्मी रतन थियाम की स्मृति में यूनिवर्सिटी थियेटर की ओर से स्वराज विद्यापीठ में आयोजित स्मृति-सभा में मणिपुर दूरदर्शन द्वारा रतन थियाम पर निर्मित वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया और उनके कृतित्व पर चर्चा करके उन्हें याद किया गया.
इस मौक़े पर जुटे विद्यार्थी वृतचित्र देख कर रतन थियाम के निर्देशन और [….]
प्रयागराज | कवि और चिंतक प्रो. बद्रीनारायण मानते हैं कि शिशिर सोमवंशी की कविताओं की वाचिकता इसकी शक्ति है. श्रवण और वाचन कविता के और तरह के अर्थ खोलते हैं. कविता बहु अर्थ देने वाली विधा है. उनका ताज़ा संग्रह भी इसी की पुष्टि करता है.
शिशिर सोमवंशी की कविताओं के संग्रह ‘शायद तुमने हो पहचाना’ के लोकार्पण [….]
संवाद बुकशेल्फ़ | ऐसे में जब शहरी लैंडस्केप से किताबों की दुकानें ग़ायब होती जा रही हैं और ऑनलाइन ठिकाने या प्रकाशक ही किताबें ख़रीदने का अकेला ज़रिया बनते जा रहे हैं, यह स्तंभ हिंदी और अंग्रेज़ी की ताज़ा छपी किताबों से आपको परिचय कराने और उनके बारे में मुख़्तसर जानकारी देने की कोशिश है. इनमें संपादक की पसंद की किताबें भी [….]
इस साल के साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार की हिंदी किताबों की श्रेणी में पार्वती तिर्की का कविता-संग्रह ‘फिर उगना’ को पुरस्कार के लिए चुना गया है. 2023 में राधाकृष्ण प्रकाशन से छपे उनके इस पहले कविता-संग्रह को हिन्दी कविता के समकालीन परिदृश्य में एक नई और ज़रूरी आवाज़ के रूप में देखा गया है. उनकी कविताओं में आदिवासी [….]
नई दिल्ली | हिन्दी कविता की युवतम पीढ़ी में पार्वती तिर्की का स्वर अलग से पहचाना जा सकता है. उनकी कविताओं में आदिवासी जीवन-दृष्टि, प्रकृति और सांस्कृतिक स्मृतियों का वह रूप सामने आता है, जो अब तक मुख्यधारा के साहित्य में बहुत कम दिखाई देता रहा है. झारखंड के कुडुख आदिवासी समुदाय से आनेवाली कवि पार्वती तिर्की को उनके [….]
संवाद बुकशेल्फ़ | ऐसे में जब शहरी लैंडस्केप से किताबों की दुकानें ग़ायब होती जा रही हैं और ऑनलाइन ठिकाने या प्रकाशक ही किताबें ख़रीदने का अकेला ज़रिया बनते जा रहे हैं, यह स्तंभ हिंदी और अंग्रेज़ी की ताज़ा छपी किताबों से आपको परिचय कराने और उनके बारे में मुख़्तसर जानकारी देने की कोशिश है. इनमें संपादक की पसंद की किताबें भी [….]
संवाद बुकशेल्फ़ | ऐसे में जब शहरी लैंडस्केप से किताबों की दुकानें ग़ायब होती जा रही हैं और ऑनलाइन ठिकाने या प्रकाशक ही किताबें ख़रीदने का अकेला ज़रिया बनते जा रहे हैं, यह स्तंभ हिंदी और अंग्रेज़ी की ताज़ा छपी किताबों से आपको परिचय कराने और उनके बारे में मुख़्तसर जानकारी देने की कोशिश है. इनमें संपादक की पसंद की किताबें भी [….]
नई दिल्ली | बानू मुश्ताक़ के कहानी-संग्रह को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जाना सभी भारतीय भाषाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह गौरवपूर्ण क्षण भारतीय भाषाओं की गहन रचनात्मकता, उनकी वैश्विक संभावनाओं और अनुवाद के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने की अद्भुत क्षमता पर गंभीरता से विचार करने की ओर [….]
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शोर के बीच, कैमरे और फ़ोटोजर्नलिज़्म की ज़रूरत ख़त्म मान लेने वाली दुनिया में ताज़ा बवंडर वर्ल्ड प्रेस फ़ोटो के उस फ़ैसले को लेकर खड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने दुनिया भर में ‘नापाम गर्ल’ के नाम से पहचानी जाने वाली तस्वीर ‘द टेरर ऑफ वॉर’ के लिए निक यूट का श्रेय निलंबित कर दिया है. 8 जून, 1972 को बनाई हुई इस तस्वीर [….]
नई दिल्ली | वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ पर आयोजित विचार गोष्ठी में विद्वानों ने कहा कि यह न सिर्फ़ एक व्यक्ति के जीवन की कथा है, बल्कि यह हिन्दी साहित्य में एक ऐसा विरल दस्तावेज़ है, जो वर्ग, श्रम, प्रकृति और विस्थापन जैसे विषयों को आत्मानुभूति के स्तर पर गहराई से छूता है. यह आत्मकथा [….]
नई दिल्ली | हिन्दी आलोचना की परंपरा को नई दृष्टि और वैचारिक दृढ़ता देने वाली विदुषी डॉ. निर्मला जैन का साहित्य, संस्कृति और शिक्षा में अप्रतिम योगदान रहा है. वे उस आलोचना परंपरा की प्रतिनिधि थीं, जो केवल प्रशंसा नहीं, विवेक के आधार पर मूल्यांकन करती है. अपनी बेबाक, स्पष्ट दृष्टि और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध डॉ. जैन ने दिल्ली विश्वविद्यालय [….]
नई दिल्ली | सीमा कपूर की आत्मकथा पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि जैसे यह किसी एक स्त्री की नहीं, बल्कि अनेक स्त्रियों की आत्मकथा है. इस तरह की आत्मकथा लिखने में बहुत साहस की ज़रूरत होती है. यह लेखनी एक जीवंत और सतत सजग नारी का आत्मकथ्य है, जिसने रंगमंच और जीवन को बेहद करीब से जिया है. बृहस्पतिवार की शाम को [….]
चंडीगढ़ | पंजाब ललित कला अकादमी और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ़ डिज़ाइन (डब्लूयूडी) की ओर से आयोजित फ़ोटो प्रदर्शनी का आज शाम को उद्घाटन हुआ. पंजाब कला भवन की सोभा सिंह आर्ट गैलरी में लगी पिक्टोरियल तस्वीरों की यह प्रदर्शनी ‘ईक्षण 2025’ 31 मार्च तक खुली रहेगी. प्रदर्शनी में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ़ डिज़ाइन के अठारह नवोदित छायाकारों [….]