हाँसदा सौभेन्द्र शेखर पेशे से डॉक्टर और तबियत से लेखक हैं. अब तक चार किताबें लिख चुके हैं. उनके पहले उपन्यास ‘द मिस्टीरियस एलमेंट ऑफ़ रूपी बास्के’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2015 से सम्मानित किया गया. कहानी संग्रह ‘द आदिवासीज़ विल नॉट डांस’ के हिन्दी अनुवाद ‘आदिवासी नहीं नाचेंगे’ को हिन्दी पाठकों के बीच भी ख़ूब सराहना मिली है. [….]
किताब
अपना मुल्क