बालीकोरिया पहुंचते-पहुंचते शाम होने लगी थी. दिसंबर-जनवरी के दिनों में तो देश के इस हिस्से में तीन-साढ़े तीन बजे तक शाम होने लगती है और पांच-साढ़े पांच बजे तक रात हो जाती है. मेरी सास मेरी पत्नी के साथ पहले ही दिल्ली से यहां आ पहुंची थीं. [….]
कटे पहाड़ों को देखते रहने से उपजी शर्म और जाम से जूझते हुए हम आगे बढ़े. आगे हमें ब्रह्मपुत्र पार करनी थी. पहले इसे पार करने के लिए लोहे का पुल था, मगर अब नया पुल बन गया है. बनावट में यह काफी-कुछ अयोध्या में सरयू पार करने के लिए बने पुल जैसा है [….]
हिंदुस्तानी सिनेमा में यथार्थवाद की बुनियाद रखने वाले बिमल रॉय ऐसे फ़िल्मकार हुए, जिन्हें ‘स्कूल’ का दर्जा हासिल है और जो जीते-जी किंवदंती बन गए. हिंदी की महान फ़िल्मों की कोई सूची उनकी फ़िल्मों के ज़िक्र के बग़ैर पूरी नहीं होती. [….]
कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, पत्रकार, स्तंभकार, संपादक, स्क्रिप्ट राइटर और नौकरशाह, ये सभी भूमिकाएं किसी एक शख़्स की हों तो कोई भी पूछ सकता है – अच्छा, कितने कमलेश्वर! [….]
जालंधर में पुराने कोर्ट रोड पर आबाद प्लाज़ा बार के बारे में बताने के लिए लोगों के पास बहुत कुछ हो सकता है, मगर वह उतना ख़ास नहीं सकता जितना कि रवींद्र कालिया के संस्मरण में है. [….]
जिस व्यक्ति के बारे में हम कह-सुन रहे हैं, इतना लिख-पढ़ रहे हैं, दरअसल पहले जान तो लें वो है क्या!
पेले के समकालीन और दुनिया के महानतम फ़ुटबॉलरों में शुमार हॉलैंड के जोहान क्रुयफ़ ने एक बार कहा था, ‘पेले एकमात्र ऐसे फ़ुटबॉलर हैं जो तर्क की सारी सीमाओं को पार कर गए हैं.’ [….]
जब किसी व्यक्ति से आपका सघन आत्मीय रिश्ता हो और उनकी रचनात्मकता और हुनर के आप एक अरसे से प्रशंसक रहे हो, तब उसका तटस्थ और निरपेक्ष मूल्यांकन सहज नहीं होता. राकेश श्रीमाल नामधारी व्यक्ति और उनकी कविताओं से मेरा परिचय एक साथ हुआ. [….]
आम बोलचाल के शब्दों के मूल की तलाश बहुत बार ख़ासी दिलचस्प होती है. उन्हें मूल रूप में या अपनी ज़बान के मुताबिक ढालकर हम बोलते हैं, और वे सुनने वालों पर अपने मायने के साथ ज़ाहिर हो जाते हैं. भाषा की ईजाद भी तो इसी मक़सद से हुई थी. [….]
फ़ीफ़ा विश्वकप इस बार खाड़ी के देश क़तर में कल यानि 20 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. 18 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में पांचों महाद्वीप की 32 सर्वश्रेष्ठ टीमें अपने अद्भुत खेल कौशल, रणनीति चातुर्य और तकनीकी श्रेष्ठता का सर्वोत्तम प्रदर्शन करेंगी. [….]
ख़ालिद जावेद के उपन्यास ‘द पैराडाइज़ ऑफ़ फूड’ को इस वर्ष का जेसीबी साहित्य पुरस्कार मिला है. उर्दू में लिखे उनके उपन्यास ‘नेमतख़ाना’ का अंग्रेज़ी अनुवाद बारां फ़ारूक़ी ने किया है. 25 लाख रुपये के इस पुरस्कार के लिए इस साल शॉर्टलिस्ट हुए पांचों उपन्यास अनूदित थे. [….]