गर एक अरसा बीत जाने के बाद भी एक छूटे शहर की सुबहें आपको याद आएं और वे आपके कांधे पर बैठ हौले-हौले मुस्कुराएं, गर उस शहर की दोपहरें बेचैन करने लगें और उन दोपहरों की धूप आपके साथ खिलखिलाए, गर उस शहर की शामें आपको सुकून से भर देती हों और आपके साथ हाथ में हाथ डालकर जब-तब चहलकदमी करने लगती हो तो समझना चाहिए कि [….]