पापा, क्या यह ठीक बात है कि हम कार को उतना प्यार कर नहीं सकते जितना कि घोड़े को? उसके नन्हे से मुँह से इतना वज़नी सवाल सुनकर मैं चौंका. जब तक मैं कुछ समझूँ-सँभलूँ वे दूसरा सवाल जड़ चुके थे – ‘ये मानवीय भावनाएँ क्या होती हैं पापा?’
यह उनकी आदत बन गई है. मैं कभी भी कहीं से किसी हालत में घर [….]