आज मेलबर्न क्लब के पुरुष एकल फ़ाइनल के बाद हारने वाले खिलाड़ी डेनिल मेदवेदेव अपने प्रतिद्वंद्वी राफा के लिए लिए कह रहे थे ‘इनसेन’ और वो उन्हें बता रहे थे ‘अमेज़िंग चैंपियन’. वे बता रहे थे कि उन्होंने मैच के बाद राफा से पूछा कि ‘क्या वे थके हैं’. [….]
मेलबोर्न के रॉड लेवर एरीना का यह बेहद ख़ूबसूरत दृश्य था – पूरा एरीना नीले रंग की रोशनी से नहाया हुआ था. यहां तक कि नीले रंग के कोर्ट पर नीले रंग का पोडियम था, नीले रंग का माइक था, मास्टर ऑफ़ सेरेमनी प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी टॉड वुडब्रिज नीले रंग का कोट पहने थे, ट्रॉफ़ी प्रेजेंटर 13 बार की ग्रैंड स्लैम विजेता महान एवोन गूलागोंग नीले रंग की ड्रेस में थीं और महिला एकल की आज की विजेता एश्ले बार्टी नीले रंग की जैकेट में थीं. ये उत्साह, उमंग और ख़ुशियां का नीला महासागर था. आख़िरकार यह 44 साल के इंतज़ार का अंत था. बार्टी 1978 में क्रिस ओ नील के बाद पहली स्थानीय विजेता जो हैं. और ख़ुशियों के इस नीले समुद्र में कुछ अलग था तो हार के ग़म में डूबी उदास काली ड्रेस में डेनिल कॉलिन्स थीं.
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जबलपुर | आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत ‘फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया’ विषय पर केंद्रित चित्रांजलि राष्ट्रीय फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता में राष्ट्रीय पर्व विशेष पुरस्कार विवेक निगम को मिला है. विवेक दिल्ली में अमर उजाला के वरिष्ठ फ़ोटोग्राफ़र हैं. प्रतियोगिता का आयोजन केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय, दक्षिण-मध्य सांस्कृतिक केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से किया गया. [….]
बिजनौर | राजपुर नवादा गाँव में पाँच कमरों और बड़े से आंगन वाली वह हवेली काफ़ी जीर्ण-शीर्ण दिखने लगी है. हवेली में दाख़िल होने के दो रास्ते हैं और इन्हीं में से एक के माथे पर लिखा ‘रामजानकी भवन’ वक़्त की मार से हालांकि अभी बचा रह गया है. सौ साल से ज़्यादा पुरानी यह हवेली दुष्यंत के पुरखों की है. यहीं वह जन्मे और उनका बचपन भी यहीं बीता. [….]
कथक गुरु बिरजू महाराज से प्रवीण शेखर की यह बातचीत 17 मई, 1995 को अमर उजाला के इलाहाबाद संस्करण में छपी. इसे पढ़कर संस्कृति के प्रति उनके सरोकार और नज़रिये की झलक तो मिलती ही है, यह भी मालूम होता है कि टेलीविज़न के ज़रिये फैल रही अपसंस्कृति के बारे में तो वह फ़िक्रमंद थे ही, संगीत सभाओं में ताली भर पीटने वाले श्रोताओं पर भी उनकी निगाह लगी हुई थी. [….]