अपनी ख़िताबी तस्वीर के बारे में बोलते हुए उस फोटोग्राफ़र को बाक़ी के लोग पूरी शाइस्तगी से सुनते रहे. पर मजाल है कि किसी ने उसे इस बात पर टोका हो कि पट्ठे ज़िंदगी में पहली बार जिस ख़ूंख़ार जानवर से मुठभेड़ पर तुम इतना इतरा रहे हो, वह चीता नहीं है. अपने मुल्क में तो चीते को आख़िरी बार सरगुजा के महाराज आरपी सिंह देव ने ही देखा था, वह भी 1948 में. वह साथी दरअसल तेंदुए के बारे में बात कर रहे थे. [….]