भारतीय सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन मीनाकुमारी की फ़िल्में, नज़्में और ज़िंदगी के क़िस्से ज़ेहन में आते ही पाकिस्तान के शायर मोहसिन चंगेज़ी बरबस याद आते हैं, ‘सुख का किरदार निभाने के लिए उम्र तमाम, मैं ने रोती हुई आंखों से अदाकारी की.’ [….]
चिंतन ने दो-तीन रोज़ पहले एक संदेश भेजा, जिसमें ट्वीटर पर पोस्ट किए हुए तीन फ़ोटो हैं. इस फ़ोटो में पीले रंग में रंगी साइकिलें दिखाई देती हैं. एक फ़ोटो में साइकिलों पर सवार सरकारी अफ़सर भी हैं. डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स (आईएएस) के ट्वीटर हैंडिल पर पोस्ट इन तस्वीरों के साथ संदेश है – बाइक्स ऑफ़ बिजनौर – वेस्ट टु वेल्थ. [….]
अगर आप रेडियो सुनते हुए बड़े हुए हैं तो ‘‘दिन है सुहाना आज पहली तारीख़ है, ख़ुश है ज़माना..’’ वाला गाना आपने ज़रूर सुना होगा. आपने यह गाना सुना भी हो तो मुमकिन है कि ओम प्रकाश भण्डारी को न जानते हों. यह ओम प्रकाश अमृतसर के जलालाबाद क़स्बे में पैदा हुए. कम उम्र में ही शायरी में मुब्तला हुए तो क़मर जलालाबादी कहलाए. [….]
आकाशवाणी के कार्यक्रमों से लेकर फ़िल्मों के संस्कृतनिष्ठ गीतों तक जिस एक शख़्स की छाप हमेशा बराबर मिलती है, वह पंडित नरेंद्र शर्मा हैं. बहुआयामी व्यक्तित्व वाले नरेंद्र शर्मा हिंदी की आन-बान और शान थे. कवि-गीतकार, लेखक, अनुवादक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रशासक – जीवन में जो भी भूमिका मिली उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. [….]