यह सौ साल पहले के उत्तरायणी पर्व की बात है. बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में जुटे जनसमूह ने अंग्रज़ों की कुली बेगार प्रथा के ख़िलाफ़ एकजुट होकर कुली बेगार रजिस्टर फाड़ डाले और सरयू और गोमती के संगम बगड़ में फेंक दिए. ग़ुलामी के ख़िलाफ़ यह ग़ुस्से की अभिव्यक्ति थी. [….]