फुटबॉल इतिहास के दो सिरों – पेले और मेसी के बीच अपनी तमाम कमज़ोरियों और अवगुणों के साथ एक मानुस – माराडोना सीना ताने खड़ा है जो सीना ठोककर फुटबॉल के देवताओं को चुनौती देता है. [….]
उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. एक प्रगतिशील कवि होने के नाते वामिक़ साहब विचारधारात्मक प्रोपगंडे को साहित्य के लिए ज़रूरी मानते हैं पर उनकी शायरी में नारा अपनी कलात्मकता के साथ इस तरह दिखलाई पड़ता है कि वह काव्य सौन्दर्य का एक अंग बन जाता है. [….]