बेशुमार किताबों की भीड़ में भी उस किताब का वजूद सबसे अलग मालूम होता था. चार रंगों वाली भीत के सामने एक बदन का ख़ाका. गहरे भूरे रंग के फीते वाली चुटिया. ऐन ऊपर राही मासूम रज़ा और नीचे की तरफ़ लिखा किताब का नाम—कारोबारे तमन्ना. [….]
दुनिया में आठ सुर थे तुम चुप्पियाँ सुनना भूल गए! —सुजाता नारायण
‘दर्रा दर्रा हिमालय’ पढ़कर ख़त्म करने के तुरंत बाद ‘रुके हुए पानी की धुन’ शीर्षक [….]
उन्होंने अपने शहर तो छोड़ दिए थे, लेकिन वे उन्हें अपने साथ, एक ज़िम्मेदारी की तरह अपने कंधों पर उठाए हुए थे. अक्सर ऐसा ही होता है. शहर पीछे छूट जाने पर भी पीछे नहीं रहते; वे आपको और भी ज़्यादा जकड़ लेते हैं. जब पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक [….]
नई दिल्ली | इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में सोमवार की शाम को अरुंधति राय अपने पाठकों और प्रशंसकों से रूबरू हुईं. यह मौक़ा उनकी ताज़ा किताब ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ पर बातचीत का था. इस ख़ास मौक़े पर उन्होंने कहा, इस किताब में [….]
नई दिल्ली | अरुंधति रॉय की बहुचर्चित किताब ‘मदर मेरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन से छपकर आ रहा है. इसका हिन्दी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है. किताब का लोकार्पण 18 जुलाई 2026 को पटना [….]