(कथाकार-आलोचक प्रेम कुमार की एक पहचान उनके साक्षात्कार भी हैं. हिंदी-उर्दू के बेशुमार यशस्वी लेखकों से उनके साक्षात्कार कृतित्व पर ही केंद्रित नहीं रह जाते, बल्कि शख़्सियत का बड़ा ख़ाका भी पेश करते हैं. साक्षात्कारों की इस सूची में उनके समकालीन [….]
नई दिल्ली | इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में सोमवार की शाम को अरुंधति राय अपने पाठकों और प्रशंसकों से रूबरू हुईं. यह मौक़ा उनकी ताज़ा किताब ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ पर बातचीत का था. इस ख़ास मौक़े पर उन्होंने कहा, इस किताब में [….]
बरेली | प्रख्यात समाज विज्ञानी और भाषाविद् प्रो.जी.एन. देवी ने कहा कि एकाधिकारवादी सत्ताएँ और कृत्रिम स्मृति भाषा को मार रही हैं. भाषा से इंसानी समाज बना. भाषा के टूटने से समाज टूट रहा है, जिसे बचाने की चिंता हमें करनी होगी. [….]
एक बड़ी चकाचौंध में छोटी-सी कोई गहमागहमी अनदेखी रह जाती है. बड़े इवेंट के बीच छोटा- सा इवेंट अनचीन्हा रह जाता है. बड़े-बड़े संघर्षों के बीच एक छोटी-सी लड़ाई बिला जाती है. बड़े- बड़े सपनों के बीच उम्मीद की एक छोटी-सी किरण अनचाही-सी [….]
फ़ाइनल मैच की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशेष प्रेस कार्यक्रम में स्पेन और अर्जेंटीना के कोच और कप्तानों के अलावा खेल शख्सियतें भी मंच पर थीं. उनमें से एनएफएल के दिग्गज टॉम ब्रैडी और एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन ड्यूरेंट के अलावा महानतम टेनिस [….]
अक्सर खेल केवल खेल के मैदान में ही नहीं खेले जाते बल्कि एक समानांतर खेल खिलाड़ियों के सीने में भी चल रहा होता है. कई बार फ़ुटबॉल जितनी पैरों से खेली जाती उतनी ही मनोभावों और उद्वेगों से भी खेली जाती है. ऐसे मैचों में खिलाड़ियों की स्किल के [….]
फीफा विश्व कप के पहले सेमीफ़ाइनल की बात करने से पहले समय को थोड़ा पीछे लिए चलते हैं और स्मृति बन चुके दो मैचों को एक बार फिर याद कर लेते हैं.
एक, बात 5 जून 2025 के यूएफा नेशंस लीग की है. इसका दूसरा सेमीफ़ाइनल फ्रांस [….]
जौनपुर | कवि, लेखक, चित्रकार, अनुवादक अजय कुमार के स्मृति दिवस पर हिंदी भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘राग जौनपुरी’ में शहर और दोस्तों ने उन्हें बड़ी आत्मीयता से याद किया. इस मौक़े पर उनकी किताब ‘राग जौनपुरी’ पर विशद बातचीत हुई, शाम [….]
फीफा विश्व कप के तीन रोमांचक दिन और बीते. चार संघर्षपूर्ण मुक़ाबले संपन्न हुए. और वो सब इतिहास का हिस्सा बना जो रात-रात भर जाग कर फ़ुटबॉल देखने के लिए चाहिए होता है. शानदार गोल. बेहतरीन बचाव. रणनीतिक चातुर्य. खिलाड़ियों का अद्भुत कौशल. [….]
नई दिल्ली | अरुंधति रॉय की बहुचर्चित किताब ‘मदर मेरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन से छपकर आ रहा है. इसका हिन्दी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है. किताब का लोकार्पण 18 जुलाई 2026 को पटना [….]