हिन्दुस्तान की सरहद के क़रीब पाकिस्तान के मुजफ़्फ़रगढ़ ज़िले में जटोई तहसील के मीरवाला गांव की मुख्तारन बीबी दूसरे गूजर किसान परिवारों की युवतियों की तरह ही एक आम युवती हुआ करती थी. 22 जून 2002 की रात उन पर टूटे क़हर ने उनके और घर वालों की ज़िंदगी में ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि सब कुछ बदल गया. वह पढ़ी-लिखी नहीं थीं और न ही इतनी ताक़तवर कि मस्तोई क़बीले के लोगों के हाथों हुई बेइज्ज़ती का बदला लड़कर ले पातीं [….]
किताब
अपना मुल्क