नॉक नॉक, हू इज़ देयर!
ये खेल आजकल न चाहते हुए भी खेला जा रहा है.
हैरानी की बात ये है कि इस खेल में बस एक खिलाडी है. पहली बार वो बंद दरवाज़े के बाहर खड़ा उसे खटखटाता है और दूसरी बार कमरे के अंदर दरवाज़े के पीछे से ख़ुद ही पूछता है, ‘कौन है?’ [….]
रंग ख़ुद में अभिव्यक्ति का शक्तिशाली माध्यम हैं. उतने ही शक्तिशाली जितने उच्चरित शब्द हो सकते हैं या लिखित शब्द. हर रंग एक कहानी कहता है, एक अर्थ ध्वनित करता है और एक प्रभाव की निर्मिति करता है. रंग दृश्यों को पूरी तरह से बदल देते हैं. टेनिस प्रेमी जानते होंगे कि समय का थोड़ा-सा अंतराल, भौगोलिक सीमाओं की दूरी [….]
सुबह की अधूरी नींद के आख़िरी लम्हे तकिये से कूद उनकी पलकों पे आ बैठते हैं. उनींदापन जीत जाता है और ढलकती पलकें धीरे-धीरे बंद होने लगती हैं. हाई ब्लड प्रेशर से आई सोज़िश की वज़ह से उनकी आँखों में कुछ महीनों से एक नई कशिश आ गई. आँखों के नीचे बन गई थैलियों में ज़िन्दगी के सारे तज़ुर्बे संभाल के रख दिए गए हैं. धूप की चमक में [….]
यात्रा वृतांत हमेशा से बहुत रुचिकर लगते रहे हैं. वे अक्सर बहुत समृद्ध कर जाते हैं. रोचकता तो उनका अंतर्निहित गुण है ही. जिन जगहों को आपने ख़ुद नहीं देखा है, इन वृतांतों के माध्यम से देखा समझा जा सकता है. और भविष्य में उन जगहों पर अगर जाना हुआ तो वे मार्गदर्शक के रूप में काम में लाए जा सकते हैं. [….]
समय कुछ ठहरा-ठहरा सा प्रतीत होता है. मानो पिछले तीन सालों में कुछ न बदला हो. न पैरा खिलाड़ियों का हौसला, न उनकी योग्यता और न उनका जज़्बा. वे पेरिस में उसी तरह पदक जीत रहे हैं, जैसे टोक्यो में जीते थे. उन्हें इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि ये पूरब है या पश्चिम. ये टोक्यो है या पेरिस. वे सिर्फ लक्ष्य साधते हैं. वे चिड़िया की आंख देखते हैं [….]
उन दिनों जब मम्मन पहलवान बदायूंनी के पेड़ों के बारे में रिपोर्ट बना रहा था, उसके इतनी दूर जाकर असर करने का तो गुमान भी नहीं था. बल्कि यूट्यूब की उस रिपोर्ट पर आज कराची से ख़तनुमा लंबी टिप्पणी मिलने से पहले तक नहीं था. सैयद फ़िरोज़ आलम शाह ने वह रिपोर्ट देखकर कराची में मम्मन ख़ाँ के ख़ानदानियों का पेड़े वाला ठिकाना खोज [….]
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के बांग्ला उपन्यास ‘देबदास’ (1917) में पारो के किरदार का असली नाम पार्वती है. ये वो पार्वती है, जिसका प्यार परवान न चढ़ सका, उन चंद लम्हों के लिए भी नहीं, जब देवदास उसके घर के बाहर आख़िरी साँसें गिन रहा था. प्रेम और विरह के दर्द की अद्भुत कहानी तीन किरदारों की है – देवदास, उसके बचपन की दोस्त पारो [….]
प्रवीण ने एक ख़बर की क़तरन भेजी, जिसके मुताबिक़ प्रयाग के आज़ाद पार्क में दो कैंटीन खोलने के लिए टेंडर मांगे गए हैं, इसमें सवा सौ लोगों के बैठने का बंदोबस्त होगा और इडली-डोसा और गरम समोसे के साथ ही राजस्थानी जलेबी और बिहारी बाटी-चोखा भी खाने को मिलेगा. ख़बर में जिस सद्भावना का ज़िक्र नहीं है कि वो यह कि इस लंबे-चौड़े पार्क में [….]
सोनीपत | विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस के मौक़े पर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ़ डिज़ाइन ने ‘फ़ॉर्म्स एण्ड फ़ोल्ड्स’ शीर्षक से आज तस्वीरों की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया. इस प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के फ़ोटोग्राफ़ी क्लब से चुनी गई 130 तस्वीरें शामिल हैं, जो इसके विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा की नज़ीर पेश करती हैं. [….]
नई दिल्ली | सत्तर के दशक में आपातकाल लगाने के पीछे इंदिरा गांधी की सत्ता में बने रहने की चाह एक बड़ा और तात्कालिक कारण था लेकिन और भी ऐसे अनेक कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने यह क़दम उठाया. उन कारणों को समझने के लिए हमें इतिहास में और पीछे जाने की ज़रूरत है. क्योंकि देश में उस आपातकाल की पृष्ठभूमि बहुत पहले से ही तैयार हो रही थी [….]