घाटमपुर | शहर के मुगल रोड पर टैंकर रोक कर ऑक्सीज़न बर्बाद करने वाले ड्राइवर के बारे में अब कुछ पता नहीं चल सका है. अफ़सर इस मामले में कार्रवाई करने की ज़िम्मेदारी से बच रहे हैं. [….]
कछुआ हमारी कहानी में ख़रगोश से दौड़ में जीता प्राणी भर नहीं है, और न ही धीमी गति की वजह से उलाहना का प्रतीक. यह दुनिया की सबसे पुरानी जीवित प्रजातियों में एक माना जाता है. [….]
यह उन दिनों की बात है जब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ का वजूद नहीं था, वर्जिश करके बनाया हुआ बदन, खा-पीकर हासिल ताक़त और अखाड़े के उस्तादों से सीखे दाँव की आजमाइश के लिए लोग कुश्ती के मैदान में उतरते थे. इन्हीं में से कुछ हार कर तो कुछ नायक बनकर बाहर आते [….]
टिहरी गढ़वाल के उस छोटे-से गाँव मरोड़ा में आमतौर पर बाहर के लोग दिखाई नहीं देते थे, यही वजह है कि धोती-कुर्ता और टोपी पहने, हाथ में संदूकची थामे उस अजनबी नौजवान को देखकर मैदान में खेल रहे बच्चों में कौतूहल जागा. खेलना छोड़-छाड़कर बच्चों भागकर उस अजनबी के पास पहुंच गए. [….]
लगभग महीने भर बाद फिर दफ़्तर जाना शुरू हो गया है. मेरे साथ साथ मां और बेटी की रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है. दिल में सुकून है. लेकिन ये सुकून ख़ुशी से आवृत न होकर भय, आशंका और संत्रास घिरा है. [….]
बांदा | पन्ना टाइगर रिज़र्व में बाघिन (पी-213) की मौत के बाद से लापता उसके चार शावक मिल गए हैं. कई दिनों की मशक़्क़त के बाद वन विभाग की टीम को ये चारों शावक खेलते हुए दिखाई दिए है. [….]
बांदा | बुंदेलखंड के इकलौते टाइगर रिज़र्व में बाघिन की मौत के बाद उसके चारों शावकों की तलाश तेज़ कर दी गई है. पन्ना टाइगर रिज़र्व पार्क प्रशासन की टीमें इस काम में लगी हैं. बाघिन का पोस्टमार्टम कराकर विसरा रख लिया गया है. [….]
फ़िल्मी दुनिया में, जहाँ सब कुछ बाज़ार का आदमी तय करता है, ‘पॉपुलर एलीमेंट’ ज़रूरी होता है, वहाँ बचाकर लिखना और वह भी सिनेमा की पूरी सदी में लगभग आधे समय तक, बहुत बड़ी बात है. कैफ़ी आज़मी ने वैचारिक प्रतिबद्धता कभी नहीं छोड़ी. [….]
बांदा | अतर्रा के दो भाई इन दिनों ज़रूरतमंदों को मुफ़्त ऑक्सीज़न मुहैया कराने की मुहिम में जुटे हुए हैं. हर रोज़ सवेरे ख़ाली सिलेंडर लेकर रीफिलिंग के लिए कबरई के प्लांट तक जाते हैं और फिर पूरे दिन उन्हें लोगों तक पहुंचाने में लगे रहते हैं. [….]
पिथौरागढ़ | व्यास घाटी को जोड़ने वाली कैलाश मानसरोवर सड़क खुल गई है. घाटी की तवाघाट-लिपुलेख सड़क में बुंदी से छियालेख तक 25 से ज़्यादा मोड़ हैं. बूंदी और छियालेख का यह मोड़ इनमें सबसे खतरनाक था. बीआरओ के मजदूरों ने दिन-रात काम करके सड़क को चौड़ा भी किया है. [….]