गोपालदास सक्सेना को ज़माना नीरज के नाम से पहचानता है. कुछ लोग उन्हें मंच के मार्फ़त पहचानते रहे तो कुछ फ़िल्मी गीतों के ज़रिये और ऐसा एक तबका हमेशा रहा जो उनके गीतों के आसान अल्फ़ाज़ और उनमें निहित दर्शन को बूझकर मगन होता. अब जब वह नहीं हैं, उनकी कविताएं उनके गीत रूह को तस्कीन बख़्शते हैं. [….]