इस बार की चित्रकूट की यात्रा के दौरान एक एजेंडा सीतापुर गाँव जाना और उन काष्ठ-शिल्पियों से मुलाक़ात का भी था, जो अपने शहर को एक और पहचान देते हैं और जिनके हाथों से गढ़े खिलौने वर्षों से देखता आया हूँ. उस्ताद शिल्पी गोरेलाल की याद भी उनके गाँव सीतापुर तक जाने की वजह बनी. [….]