नई दिल्ली | सीमा कपूर की आत्मकथा पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि जैसे यह किसी एक स्त्री की नहीं, बल्कि अनेक स्त्रियों की आत्मकथा है. इस तरह की आत्मकथा लिखने में बहुत साहस की ज़रूरत होती है. यह लेखनी एक जीवंत और सतत सजग नारी का आत्मकथ्य है, जिसने रंगमंच और जीवन को बेहद करीब से जिया है. बृहस्पतिवार की शाम को [….]