हिन्दुस्तान में ग़ज़ल गायकी को नए आयाम और मुकाम देने वाले जगजीत सिंह की ज़िंदगी के सफ़र में जालंधर अहम पड़ाव बनकर न आता तो शायद वह शोहरत की उस बुलंदी तक न पहुंच पाते. बेशक वह गाने के लिए ही इस दुनिया में आए और इसके सिवाय वह कुछ और कर भी न पाते. [….]
कृष्ण बलदेव वैद का जाना हिन्दी साहित्य की दुनिया से ऐसे प्रयोगधर्मी रचनाकार का जाना है, जिन्होंने अपने लेखन और जीवन की मान्यताओं में कभी फ़र्क नहीं किया, तमाम वादों और आडंबरों से दूर रहकर जो मुनासिब लगा, वही कहा. उन्होंने हिन्दी की पड़ोसी ज़बानों उर्दू और पंजाबी को मिलाकर भाषा का नया सौंदर्यशास्त्र और मुहावरा गढ़ा, [….]
साहित्य और संस्कृति के इतिहास में कृष्णा सोबती के नाम बहुत कुछ दर्ज है. उनके अल्फ़ाज़ ज़िंदगी के हर अंधेरे कोने में दिया बन कर कंदीलें जलाने को बेचैन मिलते हैं. फूलों को अंतत: सूखना ही होता है – बेशक जीवन के फूलों को भी! लेकिन एक समर्थ और सार्थक कलम उन्हें सदैव महकाए रखती है. ‘उम्मीद’ को अपने तईं ज़िंदा रखने के लिए संघर्षरत रहती है. ऐसी एक कलम का नाम कृष्णा सोबती था. [….]